" /> विक्रांत व्यू…नारी शक्ति की जय हो!

विक्रांत व्यू…नारी शक्ति की जय हो!

अक्सर यह सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार करने में आगे कौन है पुरुष या नारी? तो आमतौर पर लोग इसके लिए पुरुषों को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। पर आज जबकि जीवन व समाज के हर क्षेत्र में जब नारियां पुरुषों की बराबरी कर रही हैं और कई मामलों में तो उन्होंने पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है तो आखिर क्यों वे भ्रष्टाचार में ही पीछे रहें। लिहाजा अब उपरोक्त सवाल का जवाब नारियों की भी भ्रष्टाचार में सुपरफास्ट संलिप्तता को इंगित करने लगा है। देशभर अगर सिर्फ एक राज्य मध्य प्रदेश का उदाहरण लें तो वहां की नारियों ने रिकॉर्ड बना दिया है। वे रिश्वत लेने में पीछे नहीं हैं। हर पद पर काम करनेवाली सन्नारियां जमकर घूस ले रही हैं। सरपंच, पटवारी, क्लर्क, इंस्पेक्टर, बाल विकास अधिकारी, नगर पंचायत की अध्यक्ष हों या चिकित्सक। रिश्वत प्रेमी महिलाओं में ज्यादातर सरपंच हैं फिर पंचायत सचिव, पटवारी, इंस्पेक्टर, बाल विकास अधिकारी, डॉक्टर व आयुष अधिकारी का नंबर आता है। हमारे पास सिर्फ एक ही राज्य की महिलाओं की रिश्वतखोरी की कुछ ताजी घटनाएं मौजूद हैं। अगर एक  राज्य में कुछ समय के बीच का यह मामला है तो कल्पना कीजिए कि पूरे देश के क्या हालात होंगे? यानी कि चाहे पुरुष हों या महिला सभी भ्रष्टाचार की गंगा में जब भी उन्हें मौका मिलता है जमकर हाथ धोने से चूकते नहीं हैं। यहां पर पुरुष या महिला का भेद कतई न हो। नारी शक्ति की जय हो।
सपना बना मुसीबत
सपना भी अजीब होता है। किसी को खजाने का पता चल जाता है तो कोई कंगाल हो जाता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के सहजनवा थाना क्षेत्र के ग्राम तिवरान निवासी २५ वर्षीय राजू एक रात सपने में पड़ोसी के हाथों बुरी तरह से पिट गए। लेकिन दिन निकलते ही राजू ने पड़ोसी को हमला करके बुरी तरह से लहूलुहान कर दिया। धारदार हथियार से किए गए हमले में घायल हुए पड़ोसी को लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। राजू को तकरीबन आधी रात के करीब एक सपना दिखाई देने लगा, जिसके चलते वह नींद में ही चारपाई पर पड़ा हुआ कुछ बड़बड़ाने लगा। घरवालों का ध्यान जब उसके बड़बड़ाने पर गया तो उन्होंने उसकी इस हरकत को नजरअंदाज कर दिया और वे सो गए। सवेरे के समय राजू आराम के साथ बिस्तर से उठा और घरवालों को बिना कुछ बताए अपने हाथ में लोहे की एक टूटी हुई कुंडी लेकर पड़ोसी राजेश के घर पहुंच गया और जब तक राजेश एवं उसके परिवार के लोग कुछ समझ पाते, राजू ने राजेश के ऊपर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे राजेश बुरी तरह से लहूलुहान हो गया। हमले की इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। परिवार के लोगों के साथ गांववाले तुरंत लहूलुहान राजेश को उठाकर नजदीकी सामुदायिक चिकित्सा केंद्र पर ले गए। राजू ने बताया कि राजेश सपने के दौरान उसे भाले से मार रहा था इसलिए राजेश से बचने के लिए मैंने उसके ऊपर हमला कर दिया। तभी तो कहा गया है कि ज्यादा सपने देखना भी मुसीबत का कारण बन सकता है।
तो सच्चा सुकून मिलेगा
एक शादीशुदा महिला कहती है कि मैं पत्नी हूं। बीवी, औरत, जीवनसाथी, वाइफ, संगिनी, शरीक-ए-हयात, अर्धांगिनी, बेटर हाफ, गृह स्वामिनी, गृहलक्ष्मी, घरवाली आदि आप चाहे जिस नाम से पुकारिए, मेरी पहचान बदलनेवाली नहीं है न तो मेरा महत्व ही घटेगा। इन दिनों मेरे पति कुछ ज्यादा ही उड़ रहे हैं लिहाजा, कुछ सोचने के बाद मैंने पेंटर से अपनी पेंटिंग बनवा डाली। फिर कुछ सोचकर पेंटर को कहा कि गले में नवलखा हार भी बना दो। पेंटिंग बनने के बाद पेंटर ने मुझसे पूछा आपने ऐसा क्यों किया? तो मैंने उत्तर दिया कि कभी मैं मर गई तो ये दूसरी शादी कर लेंगे। नईवाली आएगी तो मेरी तस्वीर देखकर ये हार जरूर ढूंढ़ेगी और मिलेगा नहीं तो दोनों में रोज खूब झगड़ा होगा। तब मेरी आत्मा को सच्चा सुकून मिलेगा। यानी मेरे से कभी पंगा नहीं लेने का क्योंकि इसे कहते हैं, जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी। एक बार मेरे से एक सवाल पूछा गया कि यदि आपकी सास और आपके पति देव एक साथ बाघ के पिंजरे में गिर जाएं तो आप किसे बचाएंगी? इस सवाल पर मैं बहुत जोर से हंस पड़ी और फिर मेरा जवाब था- यह भी कोई पूछने की बात है? मैं यकीनन बाघ को बचाऊंगी, आखिर दुनिया में बाघ बचे ही कितने हैं? एक दिन मेरी पतिदेव से लड़ाई हो गई। आधा दिन चुपचाप गुजारने के बाद मैं पति के पास गई और बोली, इस तरह झगड़ते हम तनिक भी अच्छे नहीं लगते। चलिए एक काम करते हैं थोड़ा आप समझौता करो, थोड़ा में करती हूं। पति ने कहा ठीक है क्या करना है बोलो। तब मैंने उत्तर दिया, आप मुझसे माफी मांग लो और मैं आपको माफ कर देती हूं। मैं तो भई ऐसी ही रहूंगी। शादीशुदा नारियां ऐसी ही होती हैं कि उनसे सभी डरते हैं उनके पति भी, पड़ोसी भी और सरकार भी। चाहे घर की सरकार यानी सास हो या दिल्ली की सरकार। उनसे सभी डरते हैं।
पता पूछना मना है!
आज के जमाने में जब गूगल बाबा हैं, मैप है, तो किसी से क्यों पता पूछना? दिल्ली के एक युवक को नोएडा ट्रैफिक पुलिस से रास्ता पूछना भारी पड़ गया। रास्ता पूछने के अपराध पर पुलिस ने उनका रांग साइड का २ हजार रुपए का चालान कर दिया। इसको लेकर पीड़ित ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगाई है। सच है। क्यों पता पूछना? उस युवक को मालूम नहीं क्या कि ट्रैफिक पुलिस को सौ तरह के काम होते हैं। अपने इन कामों में ट्रैफिक पुलिस काफी बिजी रहती है। उसे डिस्टर्ब करके युवक ने गुनाह तो किया ही है। जिसकी उसे सजा मिल गई है। शुक्र मनाओ कि वह २ हजार में ही निपट गया। अगर पुलिस वाले ज्यादा मूड में होते तो चालान की रकम ज्यादा भी हो सकती थी। अगर पूछना जरूरी है तो किसी शरीफ आदमी से पूछता। पुलिस वाले से क्यों पूछा? इसलिए हर जगह, हर किसी से पता पूछना भी खतरे से खाली नहीं होता।

लेखक तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।