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विक्रांत व्यू : अपराधी खिलाड़ी

राजेश विक्रांत।  खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा से चौंकानेवाले खिलाड़ी एकाएक अपराध के दलदल में फंसते जा रहे हैं। आर्थिक तंगी, मौका नहीं मिलने, ऐशोआराम की बढ़ती इच्छाएं और जल्दी अमीर बनने के लालच में एक के बाद एक खिलाड़ी अपराध के जंजाल में फंस रहे हैं। हिसार एसटीएफ ने यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट सोनी छाबा को डवैâती के आरोप में पकड़ा है। जूडो से डवैâती तक छाबा ने काफी प्रगति की है। रंगदारी मांगने के मामले में पकड़ा गया सुरजीत स्टेट क्रिकेट टीम में खेल चुका है। हरियाणा का एक धावक दौड़ने से ज्यादा हत्या और लूटपाट में तेजी के लिए विख्यात है। एक नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियन अपनी गर्लप्रâेंड को महंगे गिफ्ट देने के लिए लुटेरा बन गया। जल्द-से-जल्द पैसे कमाने की ललक बेहतरीन खिलाड़ियों को अपराध के रास्ते पर ले जा रही है। विजय को बॉडी बिल्डिंग में मिस्टर पानीपत का खिताब जीतने से ज्यादा सुख-चेन स्नैचिंग, चोरी व लूट की वारदातों में आता है। इसी तरह से दिल्ली का डॉन गोगी भी वालीबॉल का राष्ट्रीय चैंपियन रहा है। उसे भी पैसे की खनक ने जुर्म की दुनिया का बड़ा अपराधी बना दिया। गोगी भी अब जेल की हवा खा रहा है, तो ऐसी दुष्प्रवृत्ति कब रुकेगी?
मच्छर
एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है। यह भले फिल्मी डायलॉग हो लेकिन मच्छरों ने सचमुच में समाजवाद ला दिया है। समानता ला दी है। मच्छर की समस्या से खास और आम दोनों ही जूझते हैं? चपरासी, अर्दली के साथ आईएएस, आईपीएस अफसर भी मच्छरों से परेशान होते हैं। २००५ बैच के आईपीएस अफसर आरिफ शेख मच्छरों से बेहद परेशान हैं। वे बहुत कुछ उपाय करते हैं लेकिन मच्छरों से मुक्ति नहीं मिल रही है। मच्छर के काटने से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और गैस्ट्रोएन्टराइटिस जैसी घातक बीमारियां होती हैं। सवाल यह है कि आरिफ शेख को मच्छर क्यों परेशान करते हैं? मुझे लगता है कि उनका खून मीठा होगा। शोध बताते हैं कि ओ ब्लड ग्रुप के लोगों की तरफ मच्छर सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा आकर्षित होते हैं। दूसरे नंबर पर बारी आती है ए ब्लड ग्रुप के लोगों की। ये दोनों ही ब्लड ग्रुप मच्छरों के लिए किसी चुंबक की तरह काम करते हैं। आरिफ शेख को इस पर भी ध्यान देना होगा।
नामकरण के पीछे!
महाभारत के लिए कहा गया है कि यन्न भारते तन्न भारते- जो महाभारत में नहीं है, वह भारत में नहीं। यानी भारत में जो कुछ है, महाभारत में उपलब्ध है। सिवाय अमर बनने की लालसा के। यह लालसा अजीब होती है। इंसान अमर बनने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करनेवाले गंगा नदी के घाटों में अब एक और नया घाट शामिल हो जाएगा। इस नए घाट का नाम ‘खिड़किया घाट’ है लेकिन इसे ‘नमो घाट’ भी कहा जा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री जी जल्द ही इस घाट का उद्घाटन कर सकते हैं। घाट पर तीन जोड़ी हाथ का अभिवादन करती आकृतियां बनाई गई हैं। सूर्य का अभिवादन और गंगा को प्रणाम करते हाथों के इन तीनों शिल्पों की वजह से इस घाट को लोग ‘नमो घाट’ कहते हैं। लेकिन इसके नामकरण की असली कहानी तो आप जान ही गए होंगे। विपक्ष विरही यक्ष की भांति विलाप करता रहे नमो घाट पर। जो विरोध करेगा, ईडी के जरिए उसे क्षति की दशा को प्राप्त होने की संभावना उज्ज्वल है।
नॉलेज शेयरिंग!
पंजाब और दिल्ली सरकार के बीच नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट हो गया है। दोनों कौन सा नॉलेज शेयर करेंगे, यह तो नहीं पता लेकिन यह साफ-साफ आत्मनिर्भरता के परम सिद्धांत की अवहेलना है। यह ज्ञान उर्फ नॉलेज की भिक्षा है। अकाली दल के प्रधान ने पंजाब के मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या अरविंद केजरीवाल कनॉट प्लेस में धान उगाएंगे? दरअसल, मान ने कहा था कि पंजाब शिक्षा और सेहत सीखेगा तो दिल्ली को खेती सिखाएंगे। लेकिन केजरीवाल को क्या सीखने की जरूरत है? हर कर्म तो उन्हें आते हैं। बयानबाजी से लेकर झांसा तक। झूठे वादों से लेकर लोकलुभावन आश्वासन तक। उसी तरह से पंजाब के मुख्यमंत्री को भी फेंकने की कला में महारत हासिल है। इसलिए हम कह सकते हैं कि उनके और दिल्ली के बीच यह नॉलेज शेयरिंग नहीं बल्कि ज्ञान की भिक्षा है। दो उस्तादों के बीच वैâसी नॉलेज शेयरिंग!

(लेखक तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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