मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : विचारों का सीमोल्लंघन ...और भोजनभाइयों की भीड़!

संपादकीय : विचारों का सीमोल्लंघन …और भोजनभाइयों की भीड़!

शिवसेना का ऐतिहासिक, पारंपरिक दशहरा सम्मेलन हमेशा की तरह उसी उत्साह और जल्लोष के साथ संपन्न हुआ। इस बार जोश, भीड़, उत्साह पहले की अपेक्षा ज्यादा था। शिवतीर्थ भरकर बह रहा था। डॉक्टरों ने झुकने की अनुमति नहीं दी थी फिर भी हम निष्ठावान शिवसैनिकों के आगे झुककर नतमस्तक हुए। शिवसैनिकों की निष्ठा और जनता का प्रेम हमेशा हमारा बल रहा है। इसी ताकत की बदौलत पीठ में घोंपा गया खंजर पचाकर हम खड़े हैं। शिवतीर्थ की भीड़ किराए की और पेटार्थी नहीं थी, यह पूरा महाराष्ट्र समझ गया है; क्योंकि सत्ता और पैसे के बल पर शिवतीर्थ शिवसेना को न मिले, दशहरा सम्मेलन न हो इसके लिए प्रयास किए गए। ‘मिंधे’ गुट के मुख्यमंत्री ने अपने उस बीकेसी मैदान के सम्मेलन से स्पष्ट कहा, ‘मैं मन पर ले लेता तो शिवाजी पार्क उन्हें मिलने नहीं देता।’ इसे धमकी समझी जाए या सत्ता की मस्ती? और वे कहते हैं बालासाहेब के विचारों का उत्तराधिकारी! किराए के लोगों की भीड़ जुटाकर विचारों की घुड़दौड़ नहीं की जा सकती। शिवसेना को शह वगैरह देने के लिए कहते हैं, दूसरा दशहरा सम्मेलन ‘बीकेसी’ के मैदान में हुआ। उस मैदान में भीड़ देखकर मुख्यमंत्री ने घोषणा की, ‘देखिए, यही हमारी असली शिवसेना है।’ लेकिन शिवसेना को ‘शवसेना’ बताते हुए बालासाहेब के विचारों का अपमान करनेवालों के समर्थन पर आपका वह सम्मेलन हुआ। सम्मेलन वैâसा? वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी एक ‘इवेंट’युग अपने देश में लाई है, जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक उत्सव अथवा इवेंट ही किए जाते हैं। उसी में से एक भाजपा पुरस्कृत ‘इवेंट’ दशहरे के उपलक्ष्य में बीकेसी मैदान पर हुआ। बार-बार वही रोने के अलावा वहां दूसरा और क्या हुआ? नारायण राणे भी अचंभित होकर मुंह में उंगली दबा लें, ऐसे झूठे और घिनौने आरोप हम पर लगाए गए। भाजपा खेमे में जाने से ऐसी ‘उल्टियां’ करनी पड़ती है, नहीं तो उन्हें बैलों की तरह ‘ईडी’ की ओर मोड़ दिया जाएगा। नाम शिवसेना का और सम्मेलन भाजपा का, ऐसी ही ठाठ थी। क्योंकि ‘डुप्लिकेट’ शिवसेना के नेताओं का मुख्य भाषण यानी केवल ‘मोदी-शाह चालीसा’ का वाचन ही था। पठन नहीं, केवल वाचन। भारतीय जनता पार्टी द्वारा ही बीकेसी के इवेंट की कथा-पटकथा लिखी होने के कारण मुख्य भाषण का मसौदा, रंगमंच के कलाकार, उनकी भूमिका, संवाद भी वहीं से लिखकर आए थे। ‘मुझ पर वैâसे अन्याय हुआ और मैं ही वैâसे खरा’ इसके अलावा बीकेसी की रुदनकथा में दूसरा कुछ नहीं मिलता। देश के प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के प्रति हमें आदर्श, प्रेम, आस्था है। लेकिन जिस ‘डुप्लिकेट’ सेना का सम्मेलन या उत्सव बुधवार को हुआ, उसका अलग अस्तित्व ही नहीं था। मिंधे गुट जैसे भाजपा में विलीन होकर ही तुतारी और पिपिहरी बजा रहा है, ऐसी ही सारी तस्वीर थी। ‘मोदी-मोदी और शाह-शाह’ की जितनी गर्जना भाजपा के सम्मेलनों में नहीं होती होगी, उतनी ‘डुप्लिकेट’ सेना के मुख्य नेताओं के भाषण में हो रही थी। इसे आश्चर्य ही कहा जाएगा। ‘एक दिल’ और ‘एक जान हैं हम’ इस आविर्भाव में ‘डुप्लिकेट’ सेना के मुख्य नेता ‘मा. मु.’ साहेब बोल रहे थे। उसे देखकर शिवसेना द्वारा गाड़ दिए गए कई महाराष्ट्र के दुश्मनों को आनंद ही हुआ होगा। वैसे भी बीकेसी पर जो भीड़ जुटाई गई थी, उस भीड़ में ‘जान’ भी थी क्या? खींच-तानकर दुम को नाभी पर लगाने का ही यह तरीका था। उस भीड़ का भी ‘ऑडिट’ अब सामने आ रहा है। एक-दो हजार एसटी बसें भीड़ को मुंबई में लाने के लिए बुक की गर्इं और उसके लिए १० करोड़ रुपए नकद भरे गए। ये नकद १० करोड़ रुपए एसटी कर्मचारी दो-तीन दिनों तक गिन रहे थे। यह नकद १० करोड़ रुपए मिंधे गुट के किस बैंक खाते से आए? इतने कम समय में किसने कहां हाथ मारा? साथ ही २ लाख लोगों को पंगत दी गई। बीकेसी मैदान के पीछे शाही भोजन की पंगत हो वैसा तगड़ा वैवाहिक प्रायोजन था। वहां विचार-वारिस का सम्मेलन (?) था कि ‘हाऊ डू मिंधे’, ‘नमस्ते मिंधे’ जैसा उत्सव था, ऐसा सवाल महाराष्ट्र की जनता के मन में उठ रहा है। कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम के लिए दो विधायक खरीदने जितना खर्च यानी पचास-सौ खोके खर्च हुए होंगे! यानी इस पर ‘ईडी’ आदि की नजर नहीं पड़ी। पड़ेगी भी वैâसे? कदाचित इसे नजरअंदाज किया जाए, ये पूर्वानुभव से स्पष्ट है। बुधवार को दशहरा सम्मेलन के नाम पर बीकेसी के मैदान पर कोई ‘पैâशन शो’, ‘सौंदर्य प्रतियोगिता’ हो, वैसा एक त्योहार हुआ और उसमें करोड़ों रुपए की चपत महाराष्ट्र के कल्याणकारी ‘मा. मु.’ साहेब ने लगाई तो केवल एक ही वजह के लिए, वह मतलब ‘मैं ही शिवसेना’ की खटपट साबित करने के लिए। मुख्यमंत्री ने अपने २७ पन्नों के लंबे भाषण को पढ़ा। अन्य वक्ताओं ने जो भाषण दिए, वो निर्लज्जता की हद थी। मिंधे गुट की शीतलताई ने जोरदार भाषण किया। शिवसेना की आलोचना की, लेकिन मिंधे गुटवाले सूरत-गुवाहाटी में मजे ले रहे थे तब इसी शीतलताई द्वारा हाथ में डंडा लेकर किए गए भाषणों को उसी मंच से लोगों को सुनाना चाहिए था। गद्दारों को मुंबई आने दो, डंडों से पिटाई करेंगे जैसे भाषण वो दे रही थीं। अर्जुन खोतकर तो ‘ईडी’ के डर से रोते-भागते मिंधे हुए। उससे पहले वे मिंधे गुट को ‘चूहा’ वगैरह कह रहे थे। उस मंच के सभी की एक अलग वजह और गद्दारी के खुद के व्यक्तिगत कारण हैं। मिंधे गुट के प्रमुख नेता ने कहा कि, ‘हमारे रास्ते पर न आओ। हमारे हाथ में सत्ता है। हम कुछ भी कर सकते हैं। किसी भी स्तर पर जा सकते हैं। हमारी आलोचना करनेवालों का हम क्या करते हैं? संजय राऊत आज कहां हैं? खुद को कानून का रक्षक कहलवाने वाले मुख्यमंत्री के ये बयान सबको सोचने पर मजबूर करनेवाले हैं। संजय राऊत शिवसेना की भूमिका को निष्ठा और दृढ़ता से रख रहे थे। उनकी निष्ठा और भूमिका दिक्कतों भरी लगने लगी इसलिए सत्ता और कानून का गैर इस्तेमाल करके राऊत को गिरफ्तार कर, जेल में डाल दिया, यही अब शिंदे ने स्वीकार किया है। सत्ता सिर पर इसी तरह चढ़ जाती है। वह बहुत जल्दी चढ़ गई, लेकिन लोगों का दिमाग ठिकाने पर है। उन्होंने दशहरे के दिन विचारों का सीमोल्लंघन किया। ‘बीकेसी’ पर भोजनभाइयों की भीड़ हुई होगी तो वह खोकेवालों का मसला!

अन्य समाचार