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वोटरों को लुभाने के लिए चुनावी रेवड़ियां बांटने के खिलाफ काशी में उठाई गई आवाज

उमेश गुप्ता / वाराणसी

देश-प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने के लिए चुनावी दौर में जिस प्रकार से आज की राजनीति में वोटरों को लुभाने के लिए लोक-लुभावने वादे किए जा रहे हैं, आनेवाले दिनों में आर्थिक दृष्टिकोण से उसके गंभीर परिणाम को देखते हुए काशी के लोगों द्वारा लोक-लुभावने सपने दिखाने वाले चुनावी वादों पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर मैदागीन चौराहे पर प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन करनेवालों का कहना था कि देश के तकरीबन सभी राज्यों में लगभग सभी पार्टियों की ओर से चुनावी मौसम में मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। एक आम मतदाता को आकर्षित करने के लिए आज के समय में यह सबसे अच्छा उपाय भी है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को मुफ्त की खाने की आदत पड़ गई है। लोगों की इसी कमजोरी का फायदा राजनीतिक पार्टियां उठाती रहती हैं इस मुफ्त खोरी के चक्कर में मतदाता अपना बहुमूल्य वोट दे देता है। लेकिन एक बार भी वह यह नहीं सोचता कि जो पार्टी इतना सब कुछ मुफ्त में दे रही है, आखिर वह उसका बजट कहां से लाएगी? इन सब बातों से अनभिज्ञ मतदाता उस पार्टी की सरकार बना देता है जो मुफ्त की रेवड़ियां का वादा कर रखे हैं। देश के सभी नागरिकों को इस बात पर जरूर सोचना चाहिए कि मुफ्त में दी गई कोई भी सुविधा देश की अर्थव्यवस्था पर कितना गलत असर डालती है? इसके कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का कार्य लंबित रह जाता है। देश में मुफ्त की कोई भी सुविधा देने से अर्थव्यवस्था की कमर ही टूटती है जो बिल्कुल भी सही नहीं है। एक आम मतदाता को इस बात पर विचार करना ही चाहिए कि अगर कोई पार्टी किसी भी तरह का लालच दे रही है तो एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते फर्ज बनता है कि वह अपनी जिम्मेदारी को समझ कर सभी राजनीतिक पार्टियों के मुफ्तखोरी को त्याग कर खुद को स्वावलंबी बनाएं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी चार चांद लग जाएगा।

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