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आधी आबादी की अधूरी `आजादी’!….एमएलसी चुनाव में दबंगों के कहने पर दिया वोट

सामना संवाददाता / पटना । बिहार में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें अधिकार तो दिए जा रहे हैं, लेकिन वो आज भी केवल एक मुखौटा हैं। उन्हें अपने मन का चुनने या कुछ करने आजादी नहीं है। इसकी बानगी एक बार फिर से एमएलसी चुनाव के दौरान देखने को मिला। एक महिला जनप्रतिनिधि बोली बड़े लोगों ने जिसको कहा है, उसी को वोट डाल दिए। कई जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ये सब वो नहीं जानती हैं, जिन्हें बड़े लोगों ने बोला था उन्हें वोट दे दीं। उन्होंने कहा कि जो उनकी जाति की भलाई करेगा वही प्राथमिकता में है। बाकी की चीजें हमें नहीं पता है। बता दें कि पटना के विभिन्न इलाकों से चुनी गईं महिला जनप्रतिनिधि चुनाव में वोट डालने जरूर पहुंची थीं, लेकिन अंदर वह किन्हें वोट डालेंगी ये सब बाहर बाहर ही तय कर दिए थे।
न प्रत्याशियों को जानते हैं और न मुद्दे
पटना सदर की उप प्रमुख माया देवी से बात कर चुनाव के मुद्दे को समझने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कितने लोग वोट मांगने आए और वे किस दल के थे। ये सारी बात हम नहीं बता पाएंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें ये सब कुछ नहीं पता है कि किनको वोट देना है किनको नहीं। जितने भी लोग मिलने आए हम उनसे नहीं मिले हैं।
प्रत्याशियों का नाम पता नहीं
सोनामा पंचायत की महिला जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जिनको वोट दिए उनका नाम तक नहीं पता। तीन नंबर पर वोट डालने के लिए कहा गया था उन्हें वोट दे दीं। उन्होंने कहा कि जिनको वो वोट दी हैं वो जाति का तो विकास करेंगी ही न। जाति का विकास नहीं करते तब काहे उन्हें वोट करते।

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