मुख्यपृष्ठसंपादकीयमतदाताओं, बाहर निकलिए!.. स्वाभिमानी महाराष्ट्र के लिए मतदान कीजिए!

मतदाताओं, बाहर निकलिए!.. स्वाभिमानी महाराष्ट्र के लिए मतदान कीजिए!

आज लोकतंत्र के महासंग्राम में कम से कम महाराष्ट्र में अंतिम समिधा डाली जा रही है। १३ सीटों पर वोटिंग शुरू होगी। आखिरी चरण के बाद ४ जून को चुनाव के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। यह हुआ महाराष्ट्र में। देश में अभी दो चरण के चुनाव होने बाकी हैं। चुनाव का नतीजा भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इस तरह का दिखावा करते हुए जैसे कि हम जीत को पहले ही देख चुके हैं, भारतीय जनता पार्टी और उसके शिंदे गुट के लोग अपनी निर्णायक जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा के लोग अतिविश्वास की लहर पर सवार हैं और मोदी ऐसे व्यवहार कर रहे हैं, जैसे वह तीसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं। जो लोग कह रहे हैं कि भाजपा को देश में ४ सौ पार और महाराष्ट्र में ४० पार सीटें मिलेंगी, यह उनके प्रचार का हिस्सा है; लेकिन सच तो यह है कि ये लोग जीत के प्रति आश्वस्त नहीं हैं। यह लोग मन से हार गए हैं इसलिए वे डरे हुए लोगों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।’ (जनमत की बयार कहती है कि इंडिया गठबंधन को देश में ३२५ और महाराष्ट्र में ४५ सीटें मिल रही हैं।) यदि हमेंं बहुमत मिला ही नहीं, तो किसकी मदद लेकर राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया जा सकता है, इस पर उनके अंदर उथल-पुथल शुरू हो गई है। यदि उन्हें अपने दम पर ४०० सीटें जीतने का विश्वास है तो उन्हें देशभर के सभी भ्रष्ट एवं बलात्कारी मंडलियों को अपने दल में लेकर उनकी सहायता से चुनाव लड़ने की नौबत ही नहीं आती। मोदी और शाह के सीने पर डर का दबाव है और ये डर उनके चेहरे पर साफ दिख रहा है। देश में मोदी और महाराष्ट्र में फडणवीस का पूरा प्रशासन अनैतिक था। महाराष्ट्र में चोर, लुच्चे, लफंगे, लोफर जैसे उम्मीदवारों के प्रचार में मोदी व्यस्त हो गए। शिवतीर्थ पर अंतिम सभा में उन्हें जिन लोगों के लिए प्रचार करना पड़ा, वे सभी उम्मीदवार भ्रष्टाचार और व्यभिचार के दलदल में फंसे हैं। खुद देवेंद्र फडणवीस ने ही इन उम्मीदवारों के भ्रष्टाचार की कुंडली विधानसभा में अनेक बार निकाली थी। शिवतीर्थ पर दिखाई दिया कि भाजपा की सोच और प्रचार का स्तर इस दौर में कितना गिर गया है। हालांकि, मुंबई और ठाणेकरों से ऐसे चोर-उचक्कों को वोट देने की अपील करना मोदी-फडणवीस की मजबूरी हो सकती है, लेकिन महाराष्ट्र की ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। श्रीमान फडणवीस ने स्वयं कई दफा यह आरोप लगाया कि राज ठाकरे सुपारीबाज नेता हैं। लगता है कि वही सुपारी चबाते-चबाते फडणवीस और मोदी ने महाराष्ट्र को लूटने की नई योजना तैयार कर ली है। फडणवीस एक ऐसे नेता हैं, जो सच्चाई और नैतिकता से भटक गए हैं। जिनके गुरु मोदी-शाह जैसे लोग हों, उनसे सत्य, न्याय और नीति की क्या उम्मीद की जा सकती है? जब मोदी शिवतीर्थ पर चोर, लफंगे और लुच्चों के प्रचार में व्यस्त थे, तब मुंबई के कई हिस्सों में भाजपा और मिंधों द्वारा मतदाताओं को पैसे बांटे जा रहे थे। यह सब पुलिस और चुनाव आयोग की आंखों के सामने हो रहा था। जब शिवसैनिकों ने पूर्वोत्तर मुंबई में पैसे बांटे जाने वाले केंद्र पर पहुंचकर जवाब तलब किया, तो पुलिस ने चोरों को बचाने के लिए पुरुष और महिला शिवसैनिकों पर बेरहमी से हमला किया और उन्हें झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उस गड़बड़ी के दौरान एक बड़ी रकम वहां से हटा दी गई। आश्चर्य की बात यह है कि इस चोरी के माल और अवैध काम को सुरक्षा और सम्मान देने के लिए गृहमंत्री फडणवीस खुद भाजपा उम्मीदवार के कार्यालय में आकर दमदाटी देने लगे। हाल के दिनों में जहां अवैध और चोरी का कार्य हो वहां पर फडणवीस का होना सामान्य बात हो गई है। ये भीड़तंत्र महाराष्ट्र समेत पूरे देश में पैदा हो गया है और उस भीड़तंत्र के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई छिड़ गई है। मोदी-शाह की तानाशाही के खिलाफ लोकसभा चुनाव हो रहा है। मोदी युग में लोकतंत्र और संविधान की गरिमा नष्ट हो गई और अब अगर उन्हें सत्ता मिल गई तो वे पूरे संविधान को नष्ट कर देंगे। मोदी को जीतने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है। इसलिए उनकी योजना देश में हिंदू-मुसलमान के बीच चिंगारी लगाकर अराजकता की आग लगाने की थी। इस दौरान उन्होंने लोगों को भड़काने के लिए कई कोशिशें की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र को कभी मुस्लिम लीगवादी कहा तो कभी माओवादी। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के खिलाफ भद्दी टिप्पणियां कीं। उद्धव ठाकरे का उल्लेख ‘नकली संतान’ के तौर पर कर, मोदी ने खुद को कितने हद तक गिरा दिया। बावजूद इसके मोदी चुनाव पर काबू नहीं पा सके। मोदी और उनके लोगों ने नफरत और संदेह का माहौल बनाकर दो चुनाव जीते। तीसरे चुनाव में इनका खेल बिल्कुल नहीं चलेगा। इसके लिए महाराष्ट्र की जनता का जितना आभार माना जाए उतना ही कम है। मोदी और शाह के व्यवहार को देखकर विश्वास नहीं होता कि ये दोनों गांधी की धरती से आए हैं, लेकिन महाराष्ट्र ने शिवराया की सोच के अनुरूप निडरता और निष्ठा से काम किया। ४ जून को मोदी-शाह-फडणवीस को पता चल जाएगा कि आखिर महाराष्ट्र का रसायन क्या है। फडणवीस ने बार-बार कहा है, ‘महाराष्ट्रवादियों, निकल जाओ’। अब दिख ही जाएगा कि कौन किसको राज्य से ‘बाहर’ करता है और ‘फेंकता’ है। मर्‍हाठी जनता इतनी समझदारी और स्वाभिमान से मतदान करेगी कि मोदी-शाह-फडणवीस महाराष्ट्र की सुपारी नहीं तोड़ पाएंगे। महाराष्ट्र ने मशाल जलाई है। जीत का बिगुल बज चुका है। मतदाताओं, बाहर निकलिए!

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