मुख्यपृष्ठसंपादकीयमतदान समाप्त हुआ, दरें बढ़ीं!

मतदान समाप्त हुआ, दरें बढ़ीं!

पांच राज्यों में मतदान पूरा होने के साथ ही मोदी सरकार ने अब तक दबाकर रखी दर वृद्धि की कुल्हाड़ी बाहर निकाल ली। राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का अंतिम चरण गुरुवार को समाप्त हो गया। तेलंगाना राज्य में मतदान शाम को समाप्त हुआ, पांचों राज्यों का ‘एग्जिट पोल’ सामने आया और एलपीजी सिलिंडर की कीमत बढ़ा दी गई। कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर अब मुंबई में १,७४९ रुपयों में मिलेंगे। दिल्ली में यह सिलिंडर १,७९६.५० रुपयों में और चेन्नई में १,९६८.५० रुपयों में मिलेगा। जिन पांच राज्यों में चुनाव संपन्न हुए उन राज्यों में भी यह कीमत १,८१९ रुपयों से २,०२४ रुपयों तक होगी। मोदी सरकार का यह फंडा नया नहीं है। बीते नौ सालों में हर चुनाव के समय इसका गारंटी के साथ यकीनन उपयोग किया गया है। राज्यों के विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा के, हर बार चुनाव से पहले ‘गैस सिलिंडर सस्ता’, ‘पेट्रोल-डीजल की दरों में कमी’ जैसी खबरें सुनाई देती हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यानी १६ नवंबर को एलपीजी की कीमत सरकार ने करीब ५० रुपए कम करके आम जनता को राहत आदि देने की नौटंकी की थी। बेशक यह धोखेबाजी का खेल जनता के समझ में आ गया है और उसका परिणाम कहीं-न-कहीं, कुछ हद तक जरूर पड़ेगा, इस भरोसे पर मौजूदा शासक रहते हैं। इसीलिए हर चुनाव से पहले प्रमुख तौर पर गैस और र्इंधन दर कटौती का ‘प्रयोग’ बड़े जोर-शोर से विज्ञापन बाजी से किया जाता है और मतदान के बाद उस पर पर्दा डालकर दर वृद्धि का फन बाहर निकाला जाता है। फिर गैस की दर वृद्धि हो अथवा र्इंधन की, मोदी सरकार की उंगली या तो वैश्विक बाजार की ओर रहती है या फिर तो तेल वितरण कंपनियों की तरफ। दर कम करने का श्रेय मोदी सरकार को और दर वृद्धि का ठीकरा तेल कंपनियों या वैश्विक बाजारों के सिर फोड़ दिया जाता है। अब तो सरकार को एक तारीख से और एक कारण मिला है, क्योंकि हर महीने की एक तारीख को एलपीजी गैस की नई कीमत घोषित होती रहती हैं। मोदी सरकार एक उंगली अब उनकी तरफ भी दिखाएगी ही और मतदान समाप्त होने का गैस दर वृद्धि से कोई संबंध नहीं, ऐसी चालबाजी करेगी। इसके अलावा यह दर वृद्धि केवल कमर्शियल गैस सिलिंडर की ही है, घरेलू गैस की कीमत हमने नहीं बढ़ाई, ऐसा गुणगान भी सत्ताधारी कर रहे हैं। भले ही घरेलू गैस की कीमत ‘जैसी थी’ है, बावजूद इसके कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ जाती है और अंत में इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। अगर तुम्हें आम जनता की इतनी ही परवाह है तो वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की कीमत को न बढ़ाते हुए घरेलू गैस सिलिंडर को सस्ता कर देना चाहिए था। लेकिन ऐसा न कर वाणिज्यिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी करते चले गए। यानी वाणिज्यिक गैस की कीमत नवंबर महीने में १०१ रुपए बढ़ाया गया। बाद में पांच राज्यों के चुनावों को देखते हुए ५८ रुपए कम किए गए और उसका खूब ढिंढोरा पीटा गया और फिर जैसे ही मतदान खत्म हुआ फिर से कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई। थोड़े का लालच देकर ज्यादा वसूलना यह मोदी सरकार की हमेशा की चालाकी रही है। उसमें भी गैस और पेट्रोल, डीजल की कीमत के मामलों में मोदी सरकार हमेशा आंखों में धूल झोंकती रही है। इस दफा भी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के पूर्व कमर्शियल गैस की कीमत घटाकर सरकार ने जनता की आंखों में धूल झोंकी और फिर चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ाकर अपने ‘खाने के दांत’ एक बार फिर दिखा दिए। अब यह तय है कि जनता आपके इस जालसाजी में फंसेगी नहीं। २०२४ के चुनाव में जनता तुम्हारे दांत तुम्हारे गले में गाड़कर ही रहेगी!

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