मुख्यपृष्ठसमाचारभ्रष्ट अधिकारियों की मंदिरों पर गिद्ध दृष्टि : विनीत नारायण

भ्रष्ट अधिकारियों की मंदिरों पर गिद्ध दृष्टि : विनीत नारायण

  • बिहारी जी मंदिर कॉरिडोर समस्या का हल नहीं

कमल कांत उपमन्यु / वृंदावन

बांके बिहारी मंदिर के पूर्व रिसीवर विनीत नारायण ने बांके बिहारी मंदिर को तोड़कर कॉरिडोर बनाए जाने के विचार पर आपत्ति जतायी है। उन्होंने एक प्रेस वार्ता में आज कहा कि आए दिन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से बड़ी-बड़ी हवाई योजनाएं घोषित करके जनता को भ्रमित किया जाता है। जैसे यमुना में क्रूज चलेगा, वृन्दावन-मथुरा के बीच मैट्रो चलेगी, यमुना पर लक्ष्मण झूला बनेगा, गोवर्धन की परिक्रमा हेलिकॉप्टर से होगी। पर इनमें से एक भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकती। पिछले ५ साल में परिषद अवैध कब्जे तक तो हटवा नहीं पाया तो इतनी बड़ी योजनाएं कैसे बना पाएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि ६०० करोड़ रुपए से ज्यादा परिषद ने मथुरा में तीर्थ विकास के नाम पर खर्च कर दिए। कौन विकास हुआ है, जो दिखता ही नहीं है।
श्रीनारायण ने स्पष्ट कहा कि बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनाना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। वैष्णोदेवी गुफा, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे तमाम तीर्थस्थल अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण आज लाखों भक्तों को आकर्षित करते हैं। पर क्या इनके पौराणिक भवनों या परिसरों को तोड़कर उनका विस्तार किया गया। वह बोले कि समस्या प्रबंधन की है मंदिर के आकार की नहीं। बिहारीजी मंदिर की गली को भक्तों के लिए सुविधा जनक बनाने के नाम पर उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद ने २७ करोड़ रुपए खर्च कर दिए। फिर भी उसकी दुर्दशा दूर नहीं हुई। उनका कहना था कि इन गलियों में सदियों से रहनेवाले सेवायतों और छोटे दुकानदारों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। कॉरिडोर बनने से केवल भ्रष्ट अधिकारियों और उनके दलालों की जेबें गर्म होंगी। सोचने वाली बात यह है कि वृंदावन की सारी समस्या जस की तस हैं, पर इन अफसरों की गिद्ध दृष्टि केवल कमाई वाले मंदिरों को हड़पने और मोटे कमीशन वाली परियोजनाओं बनाने में ही क्यों रहती है? तीर्थयात्रियों और ब्रजवासियों की सुविधाएं बढाने में क्यों नहीं। नारायण ने आगाह किया कि सभी बृजवासी अपनी धरोहरों की रक्षा के लिए एकजुट होकर अगर आवाज बुलंद नहीं करेंगे तो बाहर से आने वाले अफसर और नेता बृज को इसी तरह लूटते रहेंगे।

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