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विपक्षी नेताओं की ‘जासूसी’ पर ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की मुहर: ‘स्टेट स्पॉन्सर’ हैकिंग के वॉर्निंग मैसेज के बाद … मोदी सरकार ने लिया था ‘एप्पल’ पर एक्शन!

‘सिस्टम की गलती’ बताने का बनाया था दबाव
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
गत ३१ अक्टूबर को सुबह ९.३० बजे टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्हें एप्पल से ‘वॉर्निंग मैसेज’ आया है कि उनके फोन को ‘स्टेट- स्पॉन्सर’ अटैकर्स ने हैक करने की कोशिश की है। महुआ मोइत्रा अकेली नहीं थीं, उनके साथ-साथ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस नेता, शशि थरूर सहित कई और विपक्ष के सांसदों और कुछ पत्रकारों का दावा था कि उन्हें एप्पल ने ऐसी ही चेतावनी दी थी। उस समय सरकार ने हैकिंग की कोशिश के आरोपों से इंकार किया था और कहा था कि ‘एप्पल के इस नोटिफिकेशन की तह तक जाने के लिए मामले की जांच होगी।’ लगभग दो महीने बाद अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल सिक्योरिटी लैब’ ने इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है जिसके मुताबिक जिस दिन एप्पल ने विपक्ष के सांसद और पत्रकारों को ये नोटिफिकेशन भेजा, उसके ठीक एक दिन बाद ही नरेंद्र मोदी सरकार के अधिकारियों ने एप्पल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। ‘एप्पल इंडिया’ के अधिकारियों पर दबाव बनाया गया कि वो इस वॉर्निंग को अपने सिस्टम की गलती बताएं या कोई वैकल्पिक बयान तैयार करें।’
‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की इस रिपोर्ट को केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने खारिज करते हुए कहा है कि ये ‘आधे-अधूरे तथ्यों पर आधारित, पूरी तरह से मनगढ़ंत है।’ जब सांसदों ने एप्पल के इस नोटिफिकेशन के स्क्रीनशॉट को शेयर करना शुरू किया तो भाजपा के कई नेताओं ने इस वॉर्निंग पर सवाल उठाया और इस बात की ओर इशारा किया कि ‘ये एप्पल का इंटरनल थ्रेट एल्गोरिदम था जो शायद गलती से लोगों को चला गया।’ लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक दावों से अलग प्राइवेट में मोदी सरकार के अधिकारियों ने एप्पल के हिंदुस्थान में प्रतिनिधि को बुलाया और कहा कि ‘कंपनी वॉर्निंग को लेकर हो रहे राजनीतिक असर को कम करने के लिए सरकार की मदद करे। इतना ही नहीं, सरकार ने एप्पल के देश से बाहर रहने वाले एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट को बुलाया और उनसे कहा कि इस नोटिफिकेशन को लेकर एप्पल की ओर से सफाई पेश करने के विकल्प तैयार करें।’ अमेरिकी अखबार का कहना है कि इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर ये दावा किया है। इनमें से एक व्यक्ति ने कहा, ‘सरकार के लोग काफी नाराज थे।’ केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने वॉशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट का सोशल मीडिया पर बयान जारी करके खंडन किया है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘वॉशिंगटन पोस्ट की खराब स्टोरी टेलिंग का जवाब देना थकाने वाला काम है, लेकिन किसी को तो ऐसा करना ही होगा। यह कहानी आधा सच, पूरी तरह सजावटी है। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिफिकेशन को लेकर जांच अभी भी जारी है।’

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