मुख्यपृष्ठनए समाचारजनता के पैसों की बर्बादी... शीतकालीन सत्र में आनेवाले मंत्रियों की शाही...

जनता के पैसों की बर्बादी… शीतकालीन सत्र में आनेवाले मंत्रियों की शाही डिमांड

सामना संवाददाता / मुंबई

शीतकालीन सत्र का मतलब नागपुर की गुलाबी सर्दी में पिकनिक का आनंद लेना है, ऐसी मानसिकता सत्र में आनेवाले मंत्रियों की है। उनके आलीशान बंगलों का रख-रखाव जनता के पैसों से हो रहा है। मंत्रियों को आलीशान बंगले दिए जाते हैं, जबकि अधिकारियों को पांच सितारा होटलों में ठहराया जाता है। उनकी संतुष्टि के लिए जिला परिषद के विभागीय अधिकारियों को नियुक्त किया गया है और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी बेलगाम फिजूलखर्ची हो रही है।
सत्र में प्रत्येक मंत्री व अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिला परिषद में विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। नागपुर आने से पहले मंत्रियों की मंडली ने विभागाध्यक्ष को आवश्यक वस्तुओं की एक सूची भेजी। इसमें शेविंग रेजर, तौलिए, बॉडी स्प्रे आदि शामिल हैं। एक तौलिए की कीमत एक महंगे स्वेटर जितनी है। एक बॉडी स्प्रे की कीमत तीन हजार रुपए से कम नहीं है। शेविंग के लिए दिए जाने वाले एक रेजर की कीमत डेढ़ हजार रुपए है। उपरोक्त वस्तुओं की सूची विदर्भ के एक कैबिनेट मंत्री के निजी सचिव द्वारा जिला परिषद के एक विभागप्रमुख को भेजी गई थी। यह निजी सचिव मांगों को पूर्ण करने के लिए नागपुर जिला परिषद भी आए थे। विभागाध्यक्ष ने कहा कि जिला परिषद के पास फिलहाल ज्यादा काम नहीं है, इसलिए इतना खर्च करना संभव नहीं होगा। यह भी पता चला है कि इस निजी सचिव ने ‘ऊपर से’ भी दबाव डाला था।
सत्र के दौरान भोजनावकाश के दौरान मंत्री कक्ष में मंत्रियों और अधिकारियों की कतार लगी रहती है। उसके लिए एक शेफ नियुक्त किया गया है। भोजन में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों की भरमार होगी। वैसे देखा जाए तो हर साल शीतकालीन सत्र में मंत्रियों और अधिकारियों का ऐसा भव्य प्रदर्शन होता था, लेकिन इस बार पहले से भी ज्यादा सुविधा मुहैया करवाई जा रही है।
जिला परिषद के विभागाध्यक्षों को सम्मेलन में आनेवाले प्रत्येक अधिकारी को दस किलो संतरा बर्फी और पांच दर्जन संतरा उपहार में देने का भी निर्देश दिया गया है।

अन्य समाचार