मुख्यपृष्ठखबरेंगर्मी में पानी की आस... सूख रहे हैं नदी-तालाब, पालघर के ग्रामीण...

गर्मी में पानी की आस… सूख रहे हैं नदी-तालाब, पालघर के ग्रामीण भागों में बढ़ा जल संकट

गोपाल गुप्ता / मुंबई। अप्रैल महीने की भीषण गर्मी के बीच पालघर जिले में पानी की समस्या बढ़ रही है। जिलेभर में इन दिनों पानी की परेशानी देखी जा रही है। खासकर पालघर के ग्रामीण इलाकों में कुएं, नदी, तालाब सूखने लगे हैं, जिससे आदिवासी लोगों को पानी की भारी किल्लत होने लगी है। गांव के लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है। जिन भागों में टैंकर से पानी की सप्लाई हो रही है, वहां पहले से ही महंगाई से त्रस्त नागरिकों को अब पानी के दामों में बढ़ोतरी रुला रही है। दोहरी मार झेल रही जनता टैंकरों का दूषित पानी या दोगुने दामों पर मिनरल वाटर खरीदने के लिए मजबूर हो गई है।
दूषित पानी पीने को मजबूर
वर्तमान में मनपा के सामने जलापूर्ति एक बड़ी समस्या के रूप में देखी जा रही है। यही हालात शहरों की है। गर्मी में नदी, तालाब, सूखने से शहर के लोग परेशान हो गए हैं। प्यास बुझाने के लिए दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की जरूरतों का नाजायज फायदा उठाते हुए पानी माफिया चांदी काट रहे हैं। आलम यह है कि यहां पानी माफिया सैकड़ों टैंकरों से क्षेत्र के जंगलों में स्थित कुओं व खदानों से दूषित पानी भरकर निवासी क्षेत्रों में आपूर्ति कर रहे हैं। मजबूरन अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोगों को इस दूषित पानी की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। पहले लोगों को जहां प्रति टैंकर १,५०० रुपए देने पड़ते थे, वहीं अब प्रति टैंकर दो हजार से २,५०० रुपए देने पड़ रहे हैं।
तीन किमी दूर से लाते हैं पानी
पालघर जिले के ग्रामीण बाहुल्य क्षेत्रों में ज्यादातर आदिवासी रहते हैं। जव्हार, मोखाडा, वाडा, तलासरी, दहाणू, विक्रमगढ़, कासा आदि क्षेत्रों में भीषण गर्मी से कुएं, तालाब, नदी, झरने सब सूख गए हैं। जिससे यहां के लोगों को पानी की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। गांव की महिलाओं को पानी के लिए दो से तीन किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है।
मिनरल वाटर के दाम बढ़े
पालघर के शहरी इलाकों में भी जनता को पानी की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। मिनरल वाटर आम लोगों की पहुंच से दूर पहले से ही था, लेकिन अब खास लोगों की भी जेब खाली कर रहा है। मौके की नजाकत देखकर मिनरल वाटर की सप्लाई करनेवाले नागरिकों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। २० से ३० रुपए का केन अब इससे दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है। पानी की समस्या के बीच मंदी का असर भी देखा जा रहा है। लोगों को ठंडा जल उपलब्ध करानेवाले मटके खुद प्यासे रह गए हैं। बाजार में जगह-जगह मटकों की दुकानें लगी है, पर इनकी खरीदारी करनेवाले ग्राहक कम ही नजर आ रहे हैं।

अन्य समाचार