" /> पथिक! तुम चलते जाओ

पथिक! तुम चलते जाओ

पथिक! तुम चलते जाओ
अपनी राह खुद बनाओ
तेरी राह में कई तूफान हैं
बड़े-बड़े चट्टान हैं
न डरे इन्हें पार कर जाओ
पथिक! तुम चलते जाओ
कठिनाइयां आती हैं वे आएंगी
उन्हें हारना है वो हारेंगी
तुम कमजोर नहीं हो
खुद पर यकीन और बढ़ाओ
पथिक! तुम चलते जाओ
इरादा कर क्या नहीं हो सकता है
कोशिश तो कर तू संसार को बदल सकता है
अपने हाथों से अपनी हार को
जीत में बदलकर दिखलाओ
पथिक! तुम चलते जाओ
– बृजमोहन झा