मुख्यपृष्ठनए समाचारपानी नहीं `जहर' पी रहे हम! ... १ लीटर पानी की बोतल...

पानी नहीं `जहर’ पी रहे हम! … १ लीटर पानी की बोतल में होते हैं २४,०००० नैनो प्लास्टिक के टुकड़े

सामना संवाददाता / मुंबई
हाल ही में हुए एक स्टडी में बोतल बंद पानी को लेकर एक बेहद चौंकानेवाला खुुलासा हुआ है, जिसमें यह बताया गया है कि १ लीटर पानी की बोतल में तकरीबन २४,०००० नैनो प्लास्टिक के टुकड़े पाए जाते हैं। ऐसे में यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि हम जाने-अनजाने में पानी के साथ-साथ प्लास्टिक के टुकड़े यानी सीधे शब्दों में कहें तो `जहर’ ही पी रहे हैं।
गौरतलब है कि यह स्टडी प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुई है। शोध करने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि पानी की प्लास्टिक की बोतल में पाए जाने वाले कण बेहद छोटे होते हैं और यह हमारे शरीर की सेल्स और ब्लड स्ट्रीम में घुसकर हमारे शरीर के अंगों को बर्बाद कर सकते हैं। इतना ही नहीं प्लास्टिक के ये कण गर्भ में पल रहे बच्चों के शरीर में भी पहुंच सकते हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चों की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है। प्लास्टिक के ये कण हमारे बाल की चौड़ाई के १७वें हिस्से से भी छोटे होते हैं। इन्हें नंगी आंखों से देखना संभव नहीं होता है।
बता दें कि प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी पर हर जगह मौजूद है, लेकिन बोतलबंद पानी को लेकर वैज्ञानिकों में विशेष रुचि है। इसकी वजह प्लास्टिक के कणों को मानव शरीर में प्रवेश करने की क्षमता है। २०२२ में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक की कंसंट्रेशन नल के पानी की तुलना में अधिक थी। २०२१ की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि पानी की प्लास्टिक की बोतल के ढक्कन को खोलने और बंद करने से प्लास्टिक के छोटे टुकड़े पानी में मिल सकते हैं, जिससे सेहत को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

कैसे हुई रिसर्च
वैज्ञानिकों के मुताबिक, उन्‍हें बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की मौजूदगी को लेकर संदेह था, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने नई तकनीक (स्टीमुलेटेड रैमन स्कैटरिंग (एसआरएस) माइक्रोस्कोपी) का इस्तेमाल किया, जिसमें कुछ परिणाम सामने आए। उसमें बताया गया कि नैनोप्लास्टिक्स, माइक्रोप्लास्टिक्स की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि ये इंसान के पाचन तंत्र और फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं।

शरीर के अंगों को कर रहे बर्बाद
यही वजह है कि प्लास्टिक की बोतल में २ लाख से ज्यादा कण होने के बावजूद ये किसी को नजर नहीं आते हैं। इस स्टडी के आधार पर कहा जा सकता है कि बोतलबंद पानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इससे हमारे शरीर में लाखों की तादाद में प्लास्टिक के कण घुस सकते हैं। यह स्टडी कोलंबिया यूनिवर्सिटी और रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है। इससे पहले भी तमाम स्टडी में भी पानी की बोतल में नैनोप्लास्टिक होने की बात सामने आ चुकी है, लेकिन एक बोतल में इतनी ज्यादा तादाद में नैनोप्लास्टिक होती है, इसका अंदाजा पहले नहीं था।

अन्य समाचार