मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाहम गांव वाले हैं जनाब

हम गांव वाले हैं जनाब

गांव के हालात गांव से पूछो,
शहर की फैक्ट्रियों से तो धुएं निकलते हैं
गर्मियां होंगी तो पंखा पेड़ करेंगे
हम गांव वाले हैं जनाब,
सर्दियों में भी चुप रहेंगे
यहां की बोलियां ता-ता-थैया करती हैं
अंदाज यहां के अदब होते हैं
पड़ोसी के पास तो थोड़ा बैठो
यहां सब अपने लगते हैं
हम गांव वाले एक धागे से जुड़ाव होते हैं
बाहरी बातें आई तो समेट लेते हैं
हैडपंप, फसलों की नहरें एक ही होते हैं
जो दिन-रात उसी से जीवन जीते हैं
हर एक का रंग पक्का है, सभी का एक धंधा है
सबके तरह-तरह के काम हैं
न कोई बहरा है, न कोई अंधा है
चूल्हे के धुएं, वहीं फैक्ट्रियों के धुएं
वही जिंदगी के कतरे, जो सबको छुए
वही दिनचर्या की जिंदगी।
– मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश

अन्य समाचार