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असली बुलडोजर क्या होता है, हमने दिखा दिया है! …उद्धव ठाकरे का मुंब्रा में जोरदार हमला, घातियों की हवा निकली

सामना संवाददाता / ठाणे
सत्ता की मस्ती में चूर घातियों ने शिवसैनिकों के मंदिर के रूप में जानी जानेवाली शिवसेना की शाखा पर बुलडोजर चलाकर गिरा दी। मात्र उन्हें असली बुलडोजर क्या होता है, यह दिखाने के लिए मैं स्वत: मुंब्रा की सड़क पर बुलडोजर लेकर आया हूं, ऐसा जोरदार हमला कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने घातियों पर बोला। इतना ही नहीं ठाकरे ने आगे कहा कि उन्होंने हमारे पोस्टर फाड़े हैं, लेकिन अब चुनाव आने दो, हम तुम्हारी मस्ती निकालेंगे। ऐसी चुनौती भी उन्होंने गद्दारों को दी। जैसे ही ठाकरे की यह दहाड़ गूंजी, मुंब्रा के सभी लोगों ने ‘कौन आया रे कोन आया…शिवसेना का बाघ आया…’, ‘शिवसेना जिंदाबाद…’, ‘उद्धव ठाकरे आगे बढ़ो’ गगनभेदी नारे लगाए गए। उद्धव ठाकरे का जोरदार स्वागत और समर्थन देखकर घातियों की हवा ही निकल गई।
एक सप्ताह पहले मुंब्रा के शंकर मंदिर इलाके में २२ साल से काबिज शिवसेना की केंद्रीय शाखा पर घातियों ने बुलडोजर चला दिया था। इससे न सिर्फ मुंब्रा बल्कि पूरे ठाणे जिले के सभी शिवसैनिकों में गुस्से की लहर फैल गई। कल खुद पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे पदाधिकारियों और असंख्य शिवसैनिकों के साथ मुंब्रा पहुंचे और उन्होंने शाखा का निरीक्षण किया। गद्दारों के दबाव में पुलिस ने कई तरह से कोशिश की कि उद्धव ठाकरे को मुंब्रा आने से रोका जा सके, लेकिन इन सभी योजनाओं को विफल करते हुए, उद्धव ठाकरे ने मुंब्रा शाखा का दौरा किया और स्थानीय शिवसैनिकों और मुंब्रा के निवासियों से सीधे बातचीत की।
पुलिस को बगल करो और आगे आओ…
अगर हिम्मत है तो पुलिस को हटाकर सामने आओ। आज तुम दिल्लीवालों की कृपा से सत्ता में बैठे हो, लेकिन कठपुतलियों यदि मर्द की औलाद हो, तो पुलिस को बगल कर और सामने आओ और हमसे लड़ो। हम तैयार हैं। आज मैं आप सबके बीच आकर खड़ा हुआ हूं, वहीं अगर मेरा बाल भी बांका होता है तो पूरा महाराष्ट्र तुम्हें गंजा किए बिना चुप नहीं बैठेगा, ऐसी चेतावनी उद्धव ठाकरे ने घातियों को दी।
गद्दारों की जमानत जप्त
कोई भी चुनाव आ जाए। आज जो गद्दार यहां दिख रहे हैं, उन्होंने यहां कौन-कौन से कार्य किए हैं? इन गद्दारों की मनपा से लेकर लोकसभा तक जमानत जब्त कर घर भेजो। अरे इन गद्दारों का राजनीतिक जीवन कितना बाकी है? ये चंद दिनों के मेहमान हैं। बाद में फिर कहां घूमेंगे? किस्मत से तुम्हें मौका मिला था, इन लोगों ने आपको महानगरपालिका से लेकर संसद में भेजा। आज आप निर्णय कर लें कि इन दुष्टों को कोई मौका न दे, ऐसा आह्वान भी उद्धव ठाकरे ने कल किया।
इस अवसर पर शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत, विनायक राऊत, शिवसेना सचिव व सांसद अनिल देसाई, शिवसेना नेता मिलिंद नार्वेकर, अरविंद सावंत, शिवसेना ठाणे जिलाप्रमुख केदार दिघे, जिलाप्रमुख सदानंद थरवाल, उपनेता विजय साल्वी, उपनेता ज्योति ठाकरे, रायगढ़ जिलाप्रमुख शिरीष घरात, पूर्व नगरसेवक एम. के. मढ़वी, एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड समेत कई पदाधिकारी, शिवसैनिक और महाविकास आघाड़ी के कार्यकर्ता मौजूद थे।
पुलिस छावनी बना शहर
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के मुंब्रा दौरे पर पुलिस ने रोक लगा दी थी। शंकर मंदिर क्षेत्र में जहां यह शाखा स्थित है, वह इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। मुंब्रा की हर सड़क के दोनों ओर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के लिए पांच सौ से अधिक पुलिसकर्मी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एसआरपी की तीन यूनिट की फोर्स मौजूद थी। शुक्रवार रात से ही मुंब्रा में पुलिस की गाड़ियां दौड़ रही थीं। इसलिए स्थानीय नागरिकों ने सीधे पूछा कि क्या यह युद्ध का मैदान है?
गद्दारों ने फाड़े स्वागत बैनर…
उद्धव ठाकरे के स्वागत के लिए मुंब्रा शहर और ठाणे में जगह-जगह बड़े-बड़े स्वागत बैनर लगाए गए थे। महाविकास आघाड़ी की ओर से एनसीपी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने यह बोर्ड लगाया था। लेकिन देर रात घातियों ने बैनर फाड़ दिया। इससे शिवसैनिकों में गुस्से की लहर दौड़ गई। आव्हाड ने खुद मुंब्रा पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को फोन कर होर्डिंग्स फाड़े जाने का शक जताया था। घातियों ने बैनर फाड़ दिया, लेकिन महाविकास आघाड़ी ने फिर से स्वागत का बैनर लगाया और उद्धव ठाकरे का स्वागत किया।

अचानक कैसे लगाए मेडिकल कैंप ?
मुंब्रा की जिस शाखा पर गद्दारों ने मनमाने ढंग से बुलडोजर चलाया, उसके बगल में आनन-फानन में एक मेडिकल कैंप लगाया गया। देखते ही देखते वहां बैनरबाजी भी की गई। उद्धव ठाकरे के मुंब्रा दौरा पर कानून व्यवस्था की समस्या होने के डर से पुलिस ने धारा १४४ के तहत नोटिस लगाई। इस नियम के मुताबिक पांच या उससे अधिक लोगों को एक साथ इकट्ठा नहीं होना चाहिए तो फिर गद्दारों ने उद्धव ठाकरे की यात्रा के दौरान मेडिकल कैंप कैसे आयोजित किया, क्या यह प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं है? ये सवाल मुंब्रावासियों के समक्ष खड़ा हो गया है।

फटकारे
मुझे पता है कि कई वर्षों के बाद मैं आज मुंब्रा आया हूूं। आज तक कभी अपनी ऐसी दोस्ती हुई नहीं थी। एक गलतफहमी जरूर थी, लेकिन आप सभी लोगों ने देख लिया कि ढाई साल हमने कामकाज कैसे किया।

वो बड़े-बड़े होर्डिंग लगाते हैं… ‘सरकार आपल्या दारी’। मैं तो लड़ने के लिए मैदान में उतरा हूं। मैं जिनके लिए लड़ रहा हूं, कितने लोग मेरे साथ आएंगे? जाओ अब गद्दारों से पूछो… कितने लोग तुम्हारे साथ हैं… (पांच सौ- पांच सौ) और सभी लोगों को मैं यह पूछता हूं कि किराए पर कितने लोग आए हैं, एक भी नहीं? वहां तो सब किराए के टट्टू हैं… किराए का टट्टू कभी रेस का घोड़ा नहीं बन सकता है।

मैं प्रशासन को चेतावनी दे रहा हूं। आप इन चोरों के गुलाम नहीं हैं। पुलिस को भी बता रहा हूं कि तुमने आज उन चोरों को बचाया है, लेकिन मैं उन चोरों से बस इतना कहता हूं कि तुमने मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर फेंका है। अब आप देखिए कि ये मधुमक्खियां आपको कहां डंक मारेंगी।

मैं मनपा आयुक्त से भी कह रहा हूं कि मुझे नहीं पता कि आप भी खोके में गए हैं, लेकिन आपने हमारे यहां जो डिब्बा रखा है, उसे तुरंत उठा लीजिए। वर्ना मैं खुद यहां आकर बैठ जाऊंगा। कल से सभी शिवसैनिक भी यहीं आकर बैठेंगे।

जनता की सेवा के लिए आपने जो शाखा शुरू की वो शाखा आगे भी उसी जगह पर शुरू रहेगी। उससे भी बढकर हम इस शाखा का पुनर्निर्माण करेंगे।

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