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हम नहीं बदलेंगे! …महाराष्ट्र के मदरसों को बदलाव मंजूर नहीं

• मात्र ५% मदरसों ने दिखाई आधुनिकीकरण में दिलचस्पी
• राज्य में ३,००० से अधिक मदरसे होने का है अनुमान
• ‘जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत मिले सिर्फ १६१ आवेदन

सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र और राज्य सरकार मदरसों में आधुनिक शिक्षा देकर छात्रों को रोजगार योग्य बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन महाराष्ट्र के मदरसों को यह बदलाव मंजूर नहीं है। यही कारण है कि अब तक राज्य में केवल ५ फीसदी मदरसों ने आधुनिकीकरण में दिलचस्पी दिखाई है। इससे स्पष्ट होता है कि मदरसा चालकों ने हम नहीं बदलेंगे की कसम खा रखी है। राज्य में ३,००० से अधिक मदरसे होने का अनुमान है, जिन्हें राज्य सरकार ‘जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत अनुदान देती है। लेकिन इस अनुदान को पाने के लिए अब तक केवल १६१ मदरसों ने पंजीकरण कराया है।
‘जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत अनुदान पाने के लिए वक्फ बोर्ड या धर्मादाय आयुक्तालय से मदरसों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। यह पंजीकरण कम से कम ३ साल का होना चाहिए, तभी वह सरकारी अनुदान पाने के पात्र होते हैं। महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक राज्य में ३,००० के करीब मदरसे हैं लेकिन इसमें से केवल १६१ मदरसे आधुनिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ाते हुए सरकारी योजनाओं में शामिल हुए हैं। बाकी मदरसे आधुनिक शिक्षा से दूरी बनाए हुए हैं, उनको आधुनिकीकरण में कोई रुचि नहीं है।

दो लाख मिलता है अनुदान
‘जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत मदरसों को प्रतिवर्ष २ लाख रुपए का अनुदान राज्य सरकार की ओर से मिलता है। इस अनुदान से मदरसे की इमारत का जीर्णोद्धार, कंप्यूटर, प्रयोगशाला आदि के काम किए जा सकते हैं। इसके अलावा पहले साल ५० हजार रुपए पुस्तकालय और छात्रों के पुस्तक के लिए अनुदान के रूप में दिए जाते हैं, इसके बाद हर साल ५,००० रुपए पुस्तकालय और पुस्तक के लिए दिए जाते हैं।

सालाना रु.५.५ करोड़ के अनुदान
राज्य में कुल १६१ मदरसे सरकारी अनुदान प्राप्त करते हैं। इनको सालाना साढ़े पांच करोड़ रुपए अनुदान दिए जाते हैं। वर्ष २०२१-२२ में ५ करोड़ ३३ लाख ३० हजार और २०२२-२३ में ५ करोड़ ९२ लाख ९५ हजार रुपए मदरसों को अनुदान दिए गए हैं। मदरसों में आधुनिक शिक्षा के प्रति उदासीनता के बारे में पूछे जाने पर अल्पसंख्यक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मदरसा चालक सरकारी बंधन में नहीं बंधना चाहते हैं और धार्मिक शिक्षा में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उन्हें मंजूर नहीं है।

जिलाधिकारी के अध्यक्षतावाली कमेटी करती है चयन
मदरसों को सरकारी अनुदान देने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में शिक्षा विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों का समावेश होता है। यह कमेटी मदरसे पर जाकर मौका मुआयना करती है। उसके बाद रिपोर्ट देती है। जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद मदरसों को अनुदान देने पर निर्णय लिया जाता है।

अध्यापक को मिलता है मानधन
‘जाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत मदरसों में विज्ञान, हिंदी, गणित, मराठी, अंग्रेजी, सोशल साइंस, पढ़ानेवाले शिक्षक को सरकार की ओर से मानधन दिया जाता है। ६ से १२ वर्ष की उम्र के छात्र को पढ़ानेवाले शिक्षक को डीईएड होना अनिवार्य है। इनको मानधन के रूप में ६,००० रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। इसी प्रकार १३ से १८ वर्ष की उम्र के छात्रों को पढ़ानेवाले शिक्षक को बीएड होना अनिवार्य है। इन्हें ८,००० रुपए प्रतिमाह मानधन सरकार की ओर से दिया जाता है। एक मदरसे में ३ शिक्षकों को मदरसा चालक रख सकते हैं।

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