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गद्दारों का करना क्या नीचे मुंडी ऊपर पैर! युवासेनाप्रमुख की जनसभा में शिवसैनिकों के गगनभेदी नारे

  •  राजनीति में अच्छे लोगों की जगह होती है, यह साबित करके दिखा दूंगा!
  • आदित्य ठाकरे की ‘शिवसंवाद’ यात्रा में अपार भीड़! गद्दारों को मुंहतोड़ जवाब!!

सामना संवाददाता / मुंबई

शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे की ‘शिवसंवाद’ व ‘निष्ठा यात्रा’ कल सातारा और कोल्हापुर में दाखिल हुई। इस यात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। इस अवसर पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि वर्तमान में महाराष्ट्र में गंदी राजनीति चल रही है। यह देखते हुए युवक-युवतियां राजनीति में आएं, ऐसा कैसे  कहें? गद्दारों को उनकी जगह दिखाएंगे। राजनीति में भी अच्छे लोगों के लिए जगह होती है, यह मैं साबित करके दिखा दूंगा। उन्होंने कहा कि यह गद्दारी केवल शिवसेना एवं शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ ही नहीं हुई है, बल्कि यह मानवता के साथ भी गद्दारी है। क्या ऐसे गद्दारों का आप समर्थन करेंगे? ऐसा सवाल आदित्य ठाकरे ने शिवसैनिकों से पूछा।

आदित्य ठाकरे द्वारा शुरू की गई ‘निष्ठा यात्रा’ को महाराष्ट्र भर में जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा हैै। इससे विरोधियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। कल आदित्य ठाकरे ने शंभूराज देसाई के चुनाव क्षेत्र पाटण में पहुंचकर बागियों पर हमला बोला। आदित्य ठाकरे ने कहा कि जिस शिवसेना ने उन्हें पहचान दी, सत्ता और पद दिया, उसी शिवसेना से उन्होंने गद्दारी की। शिवसेना ने क्या कम दिया था? हमसे क्या गलती हुई? उनको उनकी क्षमता से ज्यादा ही दिया, यही हमारी गलती हुई। पिछले ४० वर्ष में मुख्यमंत्री ने जो विभाग अन्य मंत्रियों को नहीं दिए, वह विभाग भी उन्हें दिया गया। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने सब कुछ दिया। पक्षप्रमुख की तबीयत भी ठीक नहीं थी, ऐसे संकट काल में साथ देने की बजाय हमारे गले कौन लग रहा है, किसे तोड़ा जा सकता है? इसकी रणनीति बनाकर पार्टी तोड़ने की शुरुआत की गई। क्या यह आपको उचित लगता है? आदित्य ठाकरे द्वारा पूछे गए इस सवाल पर शिवसैनिकों ने ‘गद्दारों का करना क्या… नीचे मुंडी, ऊपर पैर…’ ऐसे जोरदार नारे लगाए।
जनता के हृदय में उद्धव ठाकरे का स्थान
आदित्य ठाकरे ने कहा कि कोरोना काल में उद्धव ठाकरे ने कुटुंबप्रमुख की तरह महाराष्ट्र की जनता का खयाल रखा। उनसे सुसंवाद बनाए रखा। बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए गए। इंसानों के साथ प्रकृति को भी संभाला। भाई-चारा बनाए रखा। कहीं दंगे नहीं हुए। सत्ता में आते ही पहला निर्णय छत्रपति शिवराय के रायगढ़ किले के लिए ६०० करोड़ रुपए आवंटित करने का लिया। आखिरी फैसला  संभाजीनगर और धाराशिव के नामांतरण का लिया गया। उद्धव ठाकरे मेनस्ट्रीम में आ रहे हैं और उन्हें जनता के हृदय में स्थान मिल रहा है, यही गद्दारों का मूल दर्द था।
जयसिंगपुर में शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि गद्दारों में दो गुट हैं। एक दबाववालों का, दूसरा फंसाकर ले जानेवालों का। जो फंसे हैं, यदि उन्हें अपने किए पर ग्लानि हो रही है तो उनके लिए ‘मातोश्री’ के दरवाजे हमेशा के लिए खुले हैं। नई सरकार पर हमला बोलते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि विदर्भ और मराठवाड़ा में कई स्थानों पर भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई। मंत्रिमंडल में तीसरा व्यक्ति है ही नहीं। जब-तब उठकर दिल्ली जाते हैं, वापस आते हैं लेकिन बाढ़ प्रभावितों की सुध लेने का उनके पास समय नहीं है। यह गैरकानूनी सरकार जल्द गिरनेवाली है।
उमड़ा जनसैलाब
आदित्य ठाकरे की ‘निष्ठा यात्रा’ में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। चिलचिलाती धूप और असहनीय तपिश में भी हजारों का जनसमुदाय उनका भाषण सुनने के लिए आतुर था। पटाखों की आतिशबाजी, ‘कौन आया रे कौन आया… शिवसेना का बाघ आया’, ‘शिवसेना जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों के साथ आदित्य ठाकरे का स्वागत किया गया।

 

 

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