मुख्यपृष्ठनए समाचारमोदी राज का ये कैसा लोकतंत्र?... एफएटीएफ की आड़ में हजारों एनजीओ...

मोदी राज का ये कैसा लोकतंत्र?… एफएटीएफ की आड़ में हजारों एनजीओ का ‘कत्ल’!

-एमनेस्टी इंटरनेशनल ने खोली पोल

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि किस तरह एफएटीएफ के दिशा निर्देशों को सरकार आतंकवाद के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करके सामाजिक हित के लिए कार्य करनेवाली संस्थाओं को निशाना बना रही है।’
अंतर्राष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) का काम है किसी देश में चलनेवाली आतंकवादी गतिविधियों और धन शोधन की समीक्षा करके उसकी रेटिंग जारी करना। इस रेटिंग के आधार पर ही दुनिया तय करती है कि वह देश निवेश करने लायक है या नहीं। इसको देखते हुए विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी संस्थाएं तय करती हैं कि उस देश को कर्ज दिया जाए या नहीं। इसकी रेटिंग ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट की होती है। अगर कोई देश ग्रे लिस्ट में होता है तो इसका मतलब है कि वहां निवेश में रिस्क है। उस देश में संदिग्ध आतंकी गतिविधियां चल रही हैं और मनी लॉन्ड्रिंग व टेरर फाइनेंस भी जारी है।
दूसरी ब्लैक लिस्ट का अर्थ है हाई रिस्क। ईरान, उत्तरी कोरिया और म्यामांर जैसे देश ब्लैक लिस्ट में हैं, जबकि पड़ोसी पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में है। एफएटीएफ की एक सिफारिश है जिसके तहत गलत कार्यों में लिप्त संगठनों पर वह प्रतिबंध लगाने को कहता है। इसके तहत पाकिस्तान को जैश, लश्कर जैसे आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। अब पाकिस्तान ने तो ऐसा नहीं किया, पर एफएटीएफ के नियमों की आड़ लेकर हिंदुस्थान में कई संस्थाओं का सरकार कत्ल कर रही है। हिंदुस्थान सरकार के इस कारनामे की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पोल खोली है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अनुसार, केंद्र सरकार ने एफएटीएफ की आड़ में हजारों एनजीओ (गैर सरकारी संगठनों) पर प्रतिबंध लगा दिया है और उनके विदेशी फंडिंग का लाइसेंस छीन लिया है। हिंदुस्थान में एनजीओ को विदेशी धन पाने के लिए ‘एफसीआरए’ के तहत ‘विदेशी योगदान लाइसेंस’ प्राप्त करना आवश्यक है।
यह वाकई चिंताजनक स्थिति है। ऐसे में अधिकांश एनजीओ को अपनी गतिविधियां बंद करनी पड़ी हैं। सरकार का आरोप है कि ये एनजीओ विदेशी दान लेकर उससे देश में अवांछित गतिविधियां चला रहे हैं। एमनेस्टी ने हिंदुस्थान की सरकार के इस जालिमपन पर एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक है ‘वेपनाइजिंग काउंटर टेररिज्म : इंडियाज एक्सप्लोशन ऑफ टेररिज्म फाइनेंसिंग एसेस्मेंट टू टारगेट सिविल सोसायटी’। इसका अर्थ है कि किस तरह एफएटीएफ के दिशा निर्देशों को सरकार आतंकवाद के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करके सामाजिक हित के लिए कार्य करनेवाली संस्थाओं को निशाना बना रही है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल का आरोप है कि हिंदुस्थानी अधिकारी अपने नागरिकों को दबाने के लिए ‘एफएटीएफ’ की सिफारिशों का फायदा उठाकर इन संस्थाओं पर जानबूझकर उनके काम में बाधा डालने का आरोप लगा रहे हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि वैâसे हिंदुस्थानी अधिकारियों ने ‘कठोर’ कानूनों को लागू करने के लिए एफएटीएफ की सिफारिशों का उपयोग किया है, जिनका उपयोग आतंकवाद से संबंधित आरोप लगाने और बाधा डालने के लिए किया जाता है। एमनेस्टी का कहना है कि ये प्रावधान न केवल अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और मानकों का उल्लंघन करते हैं बल्कि एफएटीएफ द्वारा अपनाए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों के भी खिलाफ हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी के सत्ता में आने के बाद पिछले एक दशक में करीब २०,६०० से अधिक एनजीओ के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।
इनमें से लगभग ६,००० के लाइसेंस तो २०२२ की शुरुआत के बाद से ही रद्द हुए हैं। इस बारे में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक सर्वेक्षण किया जिसमें खुलासा हुआ कि हाशिए पर रहने वाले समूहों, अल्पसंख्यकों और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर काम करने वाले १६ में से ११ एनजीओ ने मनमाने ढंग से लाइसेंस रद्द करने की पुष्टि की। इन संगठनों ने कहा कि अधिकारियों ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए, उन पर ‘सार्वजनिक संस्थानों को बदनाम करने’, ‘सार्वजनिक या राष्ट्रीय हित के खिलाफ काम करने’ या उनके मानवाधिकार कार्यों की ओर इशारा करने का आरोप लगाना शामिल है। इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार देश में किसी भी ऐसी संस्था को काम नहीं करने देनाा चाहती, जो उसकी पोल खोलती है। एक लोकतांत्रिक देश में इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है।

अन्य समाचार