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तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं? … गजब है! …हिंदुस्थान में श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा से इस्लामिक मुल्कों को आपत्ति

ओआईसी के ५७ देशों ने जताया विरोध; बताया, चिंतनीय
सामना संवाददाता / मुंबई
५०० वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में रामलला अपने तख्त पर विराजमान हुए तो इससे इस्लामिक देशों को मिर्ची लग गई। हिंदुस्थान में श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा में इन इस्लामिक मुल्कों ने आपत्ति दर्ज की है। ५७ इस्लामिक मुल्कों के संगठन ओआईसी ने विरोध जताते हुए इसे चिंतनीय बताया है।
बता दें कि इस्लामिक और मुस्लिम बहुल देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की निंदा की है। ओआईसी ने एक बयान जारी कर कहा, ‘हिंदुस्थानी शहर अयोध्या में जिस जगह पर पहले बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी, वहीं ‘राम मंदिर’ का निर्माण और इसकी प्राण प्रतिष्ठा गंभीर चिंता का विषय है।’ २२ जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बने नए राम मंदिर का उद्घाटन किया था। इस कार्यक्रम में राजनीति और बॉलीवुड के जाने-माने चेहरों से लेकर बड़ी संख्या में आम लोग भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम के ठीक एक दिन बाद, २३ जनवरी को ओआईसी ने मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाए जाने की निंदा की। अपने बयान में ओआईसी ने कहा, ‘ओआईसी देशों के विदेश मंत्रियों के काउंसिल की पिछली बैठकों में जाहिर रुख के अनुसार, हम इन कदमों की निंदा करते हैं, जिनका लक्ष्य बाबरी मस्जिद जैसे महत्वपूर्ण इस्लामिक स्थलों को मिटाना है। बाबरी मस्जिद उसी स्थान पर पांच सदी तक खड़ी थी।’
मुस्लिम आबादी के लिहाज से हिंदुस्थान, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ शीर्ष तीन देशों में है। प्यू रिसर्च के अनुसार, मुसलमानों की आबादी २०६० में सबसे ज्यादा हिंदुस्थान में होगी और दूसरे नंबर पर पाकिस्तान होगा। ओआईसी इस्लामिक या मुस्लिम बहुल देशों का संगठन है। इसके कुल ५७ देश सदस्य हैं। ओआईसी में सऊदी अरब का दबदबा है, लेकिन सऊदी अरब दुनिया के उन टॉप १० देशों में भी शामिल नहीं है, जहां मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। हालांकि, इस्लाम के लिहाज से मक्का और मदीना के कारण सऊदी अरब काफी अहम है। हिंदुस्थान मुस्लिम आबादी के लिहाज से शीर्ष तीन देशों में होने के बावजूद ओआईसी का सदस्य नहीं है। २००६ में २४ जनवरी को सऊदी अरब के किंग अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अजीज हिंदुस्थान के दौरे पर आए थे। इस दौरे में उन्होंने कहा था कि हिंदुस्थान को ओआईसी में पर्यवेक्षक का दर्जा मिलना चाहिए। सऊदी के किंग ने कहा था कि यह अच्छा होगा कि हिंदुस्थान के लिए यह प्रस्ताव पाकिस्तान पेश करे। हालांकि, पाकिस्तान ने इस पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि जो भी देश ओआईसी में पर्यवेक्षक का दर्जा चाहता है, उसे ओआईसी के किसी भी सदस्य देश के साथ किसी भी तरह के विवाद में संलिप्त नहीं होना चाहिए।

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