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अब क्या करेगा तालिबान? … अफगानी खवातीनें भी बनीं हिजाब की विरोधी

•  ईरान से अफगानिस्तान पहुंची विरोध की आग
• सड़कों पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं
एजेंसी / काबुल
हिजाब को लेकर हुए विवाद में पुलिस की पिटाई से हुई महसा अमिनी नामक युवती की मौत के बाद ईरान में शुरू हुआ हिजाब विरोधी आंदोलन लगातार उग्र होकर पैâलता जा रहा है। सुरक्षाबलों के साथ झड़प में अब तक ७५ से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत के दावे के बीच ईरान के ४६ शहरों, कस्बों और गांवों के अलावा यह आंदोलन इराक, लेबनान, तुर्की, सीरिया और अफगानिस्तान सहित अन्य मुस्लिम देशों में भी पैâल रहा है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ग्रीस, स्वीडन, ऑस्ट्रिया, प्रâांस, इटली, स्पेन और जर्मनी में गैर मुस्लिम महिलाओं के सड़क पर उतरकर ईरान की मुस्लिम महिलाओं का समर्थन करने से तमाम इस्लामिक देशों के सत्ताधीशों की नींद उड़ने लगी है।
बता दें कि तालिबान सरकार के शासनकाल में तमाम प्रतिबंधों एवं पाबंदियों से मुक्त होने के लिए संघर्ष कर रही अफगानिस्तान की महिलाओं को ईरान के हिजाब विरोधी आंदोलन से हिम्मत मिली है। ईरान की महिलाओं के समर्थन में अफगानिस्तान की मुस्लिम महिलाओं ने भी रैली निकाली।
अफगानिस्तान में हो रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए तालिबानी लड़ाकों ने रैली को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हिजाब के विरोध में ईरानी महिलाओं के समर्थन को आगे बढ़ाते हुए अफगानिस्तान के काबुल में २५ महिलाओं ने ईरानी दूतावास के समक्ष नारेबाजी की। महिला प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए तालिबान लड़ाकों ने हवा में गोलीबारी की और भीड़ को खदेड़ दिया। काबुल में महिला प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर नारे लगाते हुए कहा कि ‘ईरान बढ़ गया है, अब हमारी बारी है!’ और ‘काबुल से ईरान तक, तानाशाही को न कहो!’ इन नारों से बौखलाए तालिबान लड़ाकों ने तेजी से बैनरों को छीन लिया और प्रदर्शनकारियों के सामने उन्हें फाड़ डाला। इसके बाद हवा में गोलीबारी कर महिलाओं को खदेड़ दिया।

महिलाओं पर हैं कड़ी पाबंदियां
गौरतलब हो कि गत वर्ष अगस्त महीने में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से तालिबान को अफगानिस्तानियों के विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। सत्ता में आने के बाद से तालिबान ने सख्त शरिया कानून लागू करते हुए आम नागरिकों खासकर महिलाओं पर बेहद कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं।

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