मुख्यपृष्ठनए समाचारट्रक और टैंकर के चक्के जाम ... गड़बड़ा गई सप्लाई चेन और...

ट्रक और टैंकर के चक्के जाम … गड़बड़ा गई सप्लाई चेन और बढ़ गई पेट्रोल-डीजल की किल्लत …पेट्रोल पंप पर लगी भीड़

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
‘हिट एंड रन’ से जुड़े कानून में बदलाव के बाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। देशभर में ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप पड़ गया। ट्रक-बस चालकों ने हाईवे पर वाहन खड़े कर दिए। हिट-एंड-रन कानून के खिलाफ कई राज्यों में यह विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हालांकि, केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के झुकने के बाद ट्रांसपोर्ट संगठनों ने ट्रक-बस ड्राइवरों से हड़ताल वापस लेने का आह्वान किया है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, २०२३ में हिट-एंड-रन मामलों में १० साल की जेल की सजा और ७ लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया, इसी कानून में बदलाव के बाद कल ड्राइवरों ने विरोध तेज कर दिया। ड्राइवरों ने ट्रक, टैंकर और बसों को सड़क पर छोड़ दिया और बेमियादी हड़ताल में शामिल हो गए। ये प्रदर्शन तेजी पकड़ने लगी, यानी हड़ताल करने वाले ट्रांसपोर्ट व्हीकल की संख्या बढ़ती गई। अगर कुछ दिनों तक यही हाल रहा तो पूरे देश में न सिर्फ सप्लाई चेन ठप हो जाएगी, बल्कि फ्यूल की किल्लत भी नागरिकों की मुसीबत बढ़ाएगी। यह सोचकर केंद्र सरकार को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।
देश में ट्रक एसोसिएशन की यह हड़ताल आम चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले शुरू हुई। ऐसे में राजनीतिक माहौल भी गरमाने की संभावना बढ़ गई। नए कानून का देशभर में जगह-जगह विरोध देखने को मिला है। हड़ताल का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश में हड़ताल ने असर दिखाना शुरू कर दिया। इस मामले में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी ने बताया कि ड्राइवर अपनी इच्छा से हड़ताल पर हैं।
३० लाख से ज्यादा ट्रकों का हुआ चक्का जाम
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि देश में ९५ लाख ट्रक-टैंकर हैं। इनमें से ३० लाख से ज्यादा ट्रक-टैंकर की सेवाएं ठप हो गई। इसी वजह से पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ। हालांकि, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन हड़ताल को लेकर कल हुई बैठक में केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद एसोसिएशन ने ट्रांसपोटरों को शांति बनाए रखने के अपील की है।
सप्लाई चेन पर भी मंडराया संकट
इधर, सप्लाई चेन प्रभावित होने से लोगों की रोजमर्रा की जरूरत पर संकट बढ़ मंडराने लगा। दूध, सब्जियां, दवाएं, खाने-पीने का सामान, रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की किल्लत प्रमुख तौर पर बढ़ने की संभावना जताई गई। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्कूल बसों से लेकर वैâब सर्विस भी ठप हो गई थी। यात्रियों को परेशान होना पड़ा। भोपाल में निजी एंबुलेंस भी इस हड़ताल में शामिल हो गई थीं।
दूध-सब्जियों की सप्लाई हुई प्रभावित
सब्जी बेचनेवालों का कहना है कि बाहर से सप्लाई नहीं आ पा रही थी। उन्होंने कहा कि जिन सब्जी व्यापारियों के निजी वाहन हैं, वे ही मंडियों तक पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में ५० फीसदी से ज्यादा सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है। इसी तरह, दूध और किराना मार्केट  भी प्रभावित हो गया।
क्यों हुआ विरोध?
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने रोड रेज या हिट एंड रन (रोड एक्सीडेंट) करके भागने वालों के खिलाफ कानून में बड़े बदलाव किए हैं। ये कानून जल्द ही लागू होने वाला है। नए कानून के तहत अगर कोई शख्स रोड पर एक्सीडेंट करके भाग जाता है और घायल को सड़क पर ही छोड़ देता है तो उसे १० साल की सजा होगी और ७ लाख रुपए तक का जुर्माना किए जाने का प्रावधान है। हालांकि, मानवीयता दिखाने पर कुछ राहत का भी प्रावधान किया गया है। अगर एक्सीडेंट करने वाला ड्राइवर घायल व्यक्ति को हॉस्पिटल तक पहुंचाता है तो उसकी सजा कम कर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे मौतों की संख्या में कमी आएगी और लोगों को सही समय पर उपचार मिल सकेगा।
क्या कहना है ड्राइवरों का?
ट्रक-टैंकर और अन्य ड्राइवर्स का कहना है कि हादसे के बाद घटनास्थल पर रुकना उनके लिए खतरा बन सकता है। किसी भी हादसे के बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिलती है और भीड़ की शक्ल में लोग तोड़फोड़, हंगामा, मारपीट और आगजनी तक पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में अगर भीड़ ने घेर लिया तो जान मुसीबत में आ सकती है।
आईपीसी में क्या है प्रावधान
‘हिट एंड रन’ के केस में अब तक आईपीसी की धारा २७९ (लापरवाही से वाहन चलाना), ड्राइवर की पहचान होने की स्थिति में ३०४ ए (लापरवाही से मौत) और ३३८ (जान जोखिम में डालना) के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है। कुल दो साल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। यही वजह है कि अक्सर चालक हादसे के बाद वाहन लेकर या छोड़कर भाग जाते थे। दरअसल, आईपीसी की धारा ८० दुर्घटना को सामान्य बचाव के रूप में बताती है। इसके मुताबिक, कोई भी काम अपराध नहीं है, जो दुर्घटना या दुर्भाग्य से किया जाता है। धारा १६१ में हिट एंड रन के पीड़ितों को मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
अब बीएनएस में क्या है प्रावधान?
ँर्‍ए में धारा १०४ में हिट एंड रन का जिक्र किया गया है। इसमें ड्राइवर की लापरवाही से किसी नागरिक की मौत होने पर १० साल की सजा का प्रावधान किया गया है। धारा १०४(१) और धारा १०४(२) में हिट एंड रन को परिभाषित किया गया है। धारा १०४(२) कहती है, जो कोई भी लापरवाही से वाहन चलाकर किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनता है और गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है। घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बिना भाग जाता है तो उसे किसी भी अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे १० साल तक बढ़ाया जा सकता है और ७ लाख जुर्माना भी देना होगा।

 

अन्य समाचार