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लोगो के सपनों को हकीकत में बदलने वाले बोईसर के कब आएंगे अच्छे दिन

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर

पालघर जिले के बोईसर-तारापुर इलाके में एशिया का नामचीन औद्योगिक क्षेत्र है। इंडस्ट्रीज एरिया होने की वजह से ये अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां की करीब डेढ़ हजार फैक्ट्रियों में करीब दो लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। विशाल औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण बोईसर और आस-पास के इलाके की जनसंख्या लाखों में है और लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं के मामले में आज भी ये इलाका पिछड़ा हुआ है। नौजवानों के सपनो को पंख देने वाले शहर में रहने वाले आज भी लाखों लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है। बोईसर में आज भी हॉस्पिटल, सड़क, गटर लाइन, डंपिंग ग्राउंड, सार्वजनिक गार्डन जैसी तमाम मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। बोईसर और आस-पास की ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगरपालिका बनाने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। आबादी से लेकर आय तक का गुणा भाग करें तो सभी दृष्टि से बोईसर का हक बनता है कि उसे नगरपालिका का हक मिले। बोईसर की भूमि ने कई राजनीतिक धुरंधर भी दिए पर सत्ता व राजनीति के इस शतरंजी खेल में शहर को कुछ खास हासिल नही हो पाया। लाखों लोगों के सपनों को हकीकत में बदलने वाले इस शहर के आदर्श बनने के सपने कब पूरे होंगे? यह सवाल हर बोईसरकर के मन में है।

बोईसर और आस-पास की ग्राम पंचायतों को मिला कर नगरपालिका बनाने की हो रही मांग

बोईसर, सरावली, खेरापाडा, बेटेगांव, सालवड और पास्थल जैसी ग्राम ग्राम पंचायतों की आबादी करीब दो लाख होगी। इसलिए इन ग्राम पंचायतों को मिलाकर इसे नगरपालिका/नगर परिषद का दर्जा देने की मांग बीते कई वर्षो से हो रही है, लेकिन यहां के निवासियों को अब तक सिर्फ जनप्रतिनिधियों से वादे और आश्वाशन ही मिले हैं।
बोईसर तारापुर का औद्योगिक इलाका सरकार के लिए सोने के अंडे देने की मुर्गी से कम नही है। सालाना अरबों रुपए की जीएसटी देने वाला औद्योगिक हब है, लेकिन आज भी बोईसर और आस-पास के इलाके मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। यहां के कई इलाकों में अप्रैल से पेयजल की समस्या शुरू हो जाती है। एमआईडीसी में टाटा, जिंदल, विराज, बॉम्बे, रेयॉन, सियारामस, लूपिन, वाडीलाल के अलावा देश की ब्रांडेड कम्पनियां यहां मौजूद है, लेकिन आज भी बोईसर और आस-पास के इलाकों की पहचान एक पिछड़े हुए इलाकों में होती है।
बोईसर के तारापुर में देश का पहला परमाणु घर होने के कारण भी विशेष स्थान रखता है। यहां पर मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेन का भी स्टॉपेज प्रस्तावित है। कुछ किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे 48 से शहर जुड़ा हुआ है व महाराष्ट्र का बड़ा फिशिंग पोर्ट सातपाटी यहां से 20 किलोमीटर दूरी पर है।

डंपिंग ग्राउंड की नहीं है व्यवस्था

लाखों लोग भीषण दुर्गंध और बढ़ते प्रदूषण में जीवन जीने को मजबूर है। ऐसे में बोईसर और आस-पास की ग्राम पंचायतों में डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था न होने से यहां से निकला कूड़ा कई बार रोड पर डाले जाने से सड़क के किनारे गंदगी का अंबार लग जाता हैं। सिर्फ बोईसर शहर की आबादी करीब एक लाख है। शहर से रोजाना 10 टन से अधिक कचरा निकलता है, लेकिन कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था न होने के कारण शहर के कई इलाकों में भी गंदगी का साम्राज्य फैला रहता है। इसी तरह खेरापाड़ा ग्रामपंचायत में डंपिंग ग्राउंड न होने के कारण यहां से निकले कचरे को बोईसर-पालघर रोड के किनारे स्थित एक मैदान में कचरे को फेंका जाता है। बोईसर शहर में घुसने से पहले लोगों का गंदगी स्वागत करती है। कूड़े में अक्सर आग लग जाती है, जिससे वायु प्रदूषण फैलता है। शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बोईसर के आस-पास की ग्राम पंचायतों में बड़ी संख्या में श्रमिक रहते है, जिससे यहां से भी करीब ३० टन कचरा रोजाना निकलता है, जिससे कूड़े का निस्तारण आज भी यहां की एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

जानें नगरपालिका आ जाने से क्षेत्र को क्या होगा फायदा

नगरपालिका बनाए जाने पर यहां विकास की उम्मीदों को पंख लग जाएंगे। साथ ही लोगों की कई समस्याओं का निदान होगा और सुविधाओं में बढोतरी होगी।
बोईसर ग्राम पंचायत हर दृष्टि से नगरपालिका के मापदण्ड को पूरा करती है। आय के लिहाज से प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में बोईसर ग्राम पंचायत अग्रणी स्थान बनाए हुए है। आबादी की दृष्टि से देखा जाए तो प्रदेश में ऐसी कई नगरपालिकाएं कार्यरत हैं, जिनकी आबादी बोईसर की आबादी से भी कम है।

नगरपालिका से ये होंगे लाभ

◆ नगरपालिका होने पर कस्बे में सीवरेज लाइन, सड़क आदि मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी।
◆ अग्निशमन वाहन मुहैया हो सकेगा। ऐसे में क्षेत्र में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा।
◆ यहां गायनिक, सर्जन इत्यादि चिकित्सकों के पद सृजित होने पर मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी।
◆ बाजारों, गलियों में सफाई व रोशनी की सुविधा सुदृढ़ होगी।
◆ नगरपालिका बनने से यातायात पुलिसकर्मी की कमी दूर होगी। इससे नगर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी।

सरकार और जनप्रतिनिधियों ने बोईसर को छोड़ा लावारिस

लोगों का कहना है कि बोईसर और आस-पास के इलाकों के विकास के लिहाज से नगरपालिका का होना जरूरी है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों ने शहर को लावारिस छोड़ दिया है।
बोईसर की रहने वाली कुसुम का कहना है कि ग्राम पंचायत होने के चलते विकास कार्य आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो पा रहे हैं। अब आगे का विकास नगरपालिका से ही संभव है। वर्तमान में ग्राम पंचाायत को विकास के लिए जो राशि सालाना मिलती है, वो राशि नगरपालिका बनने पर कई गुना हो जाएगी। इससे बोईसर के विकास की गति काफी बढ़ जाएगी। जिससे शहरवासियों को जहां मूलभूत सुविधाएं मिलेगी वहीं शहर का कायाकल्प भी हो जाएगा।

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