मुख्यपृष्ठसमाचारकैंसर पर कब कसेगी नकेल?

कैंसर पर कब कसेगी नकेल?

-ग्रामीण की सड़कों पर दौड़ेगी कैंसर डायग्नोस्टिक वैन

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

कोरोना महामारी के बाद से पूरी तरह से बदली जीवनशैली और खान-पान लोगों को कई गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल रहा है। इस फेहरिस्त में जानलेवा बीमारी कैंसर भी शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि आनेवाले सालों में वैंâसर की सुनामी आएगी। इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत इस साल से ही प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सड़कों पर कैंसर डायग्नोस्टिक वैन दौड़ेगी। इसके साथ ही चार जिलों में रेडियोथेरेपी यूनिट भी स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसे लेकर ३५९.४४ करोड़ रुपए की निधि को मंजूरी मिली है। साथ ही दो दिन पहले शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि कैंसर को लेकर दुनियाभर में जारी शोध के बावजूद अभी इसे असाध्य रोगों की श्रेणी से बाहर नहीं किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले १० साल में कैंसर का रूप और भी विकराल होगा। कैंसर से होनेवाली मौतें २१ से ३१ फीसदी तक बढ़ सकती हैं, वहीं ४० साल की उम्र वाले रिस्क जोन में आ सकते हैं। जानकारों का कहना है कि कैंसर के पीछे जेनेटिक फैक्टर के अलावा रेड मीट, नमक, शराब, तंबाकू, गुटखा की वजह से ५० साल से नीचे के उम्र वाले कैंसर का शिकार हो रहे हैं। दूसरी तरफ चिकित्सकों के मुताबिक, डायग्नोस्टिक टूल्स के विकसित होने और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ने से ज्यादा लोग जांच करवाते हैं। इससे कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। इन संभावनाओं को देखते हुए महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर डायग्नोस्टिक वैन खरीदने और रेडियोथेरेपी सेंटर स्थापित करने का फैसला किया है, ताकि इस जानलेवा बीमारी पर नकेल कसा जा सके। बताया गया है कि ठाणे में बन रहे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कैंसर अस्पताल बनाया जा रहा था। हालांकि, मुंबई के सह निदेशक ने ठाणे की बजाय इन जिलों में कैंसर अस्पताल स्थापित करने की पैरवी की थी।
समय पर पकड़ में आएगी बीमारी
अकोला, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर, लातूर, ठाणे, नागपुर, नासिक और पुणे परिमंडलों के लिए ८ डायग्नोस्टिक कैंसर वैन खरीदा जा रहा है। एक वैन एक परिमंडल में स्थित साधारण से लेकर दुर्गम क्षेत्रों में दौड़ेगी। इस वैन की मदद से कैंसर मरीजों की खोज की जाएगी। इससे यह लाभ होगा कि शुरुआत में बीमारी को पकड़ कर उसका समय पर इलाज कर ठीक किया जा सकेगा। फिलहाल, आवश्यक निधि को मंजूरी के नहीं मिलने के कारण वैन खरीदी का प्रस्ताव लटका हुआ था, जिसे दो दिन पहले मंजूरी मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी शासनादेश में बताया गया है कि करीब एक करोड़ की इस वैन के लिए कुल ८०.७ करोड़ रुपए के धनादेश को मंजूरी दी गई है।
टर्न-की बेसिस पर स्थापित किया जाएगा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी यूनिट
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र के तहत अस्पतालों को मजबूत करने के लिए टर्न-की बेसिस पर जालना, रत्नागिरी, बारामती और धाराशिव में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी यूनिट (रेडियोथेरेपी यूनिट) स्थापित करने के लिए ३५९.४४ करोड़ रुपए की धनराशि मंजूर हुई है। इसमें २८०.४० करोड़ रुपए उपकरणों और साधन-सामग्रियों पर खर्च होगा, जबकि १११.०४ करोड़ रुपए में इमारत का निर्माण किया जाएगा। बताया गया है कि ६४४०० स्क्वायर फीट में बनने वाले एक यूनिट पर ८९.८६ करोड़ रुपए खर्च होगा।
ये होंगी सुविधाएं
हर रेडियोथेरेपी यूनिट में हिस्टोपैथोलॉजी, हिमाटोपैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी के साथ ही आईपीडी एंड डे केयर के तहत ४० बेड, सीटी स्कैन, एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, सेंट्रल स्टेरिल सप्लाई, रेडियोथेरेपी डिपार्टमेंट, ब्रैकीथेरेपी ओटी, ब्रैकीथेरेपी रिकवरी के चार बेड, ओपीडी के साहित्य आदि की सुविधाएं दी जाएंगी।

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