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पुलिस-बीएसएफ जानकारी से भटके आतंकी कहां से टपके!… सुंजवां में ढेर हुए आतंकियों पर संशय बरकरार

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू । सुंजवां में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मुहम्मद के जिन २ आतंकियों को मार गिराया गया था, कहां से टपके थे, फिलहाल अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। इस मुद्दे पर बीएसएफ और पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो चुका है। कल जारी मुठभेड़ के बीच ही पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने दावा किया था कि आतंकी जम्मू सीमा के सांबा सेक्टर से हाल ही में ४० किमी का सफर तय करके सुंजवां पहुंचे थे, जबकि दावों के दौरान यह नजरअंदाज किया गया कि ४० किमी की दूरी में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के तीन दर्जन से ज्यादा नाके थे और वे इन नाकों को वैâसे पार कर गए। पुलिस का कहना है कि आतंकी सांबा के इंटरनेशनल बॉर्डर से घुसपैठ कर इस ओर आए थे। लेकिन बीएसएफ इसे नहीं मानती। बीएसएफ का कहना है कि कहीं भी तारबंदी नहीं कटी है और सांबा सेक्टर में नदी-नालों में कहीं भी उनकी थर्मल इमेजस रिकॉर्ड नहीं की गई है। पहले यह भी आशंका व्यक्त की जा रही थी कि आतंकी सीमा क्षेत्र में उपस्थित किसी सुरंग से इस ओर आने में कामयाब हुए थे जैसा कि पहले अतीत में कई बार हो चुका है। हालांकि पिछले तीन सालों मेंं ऐसी १२ सुरंगों को नेस्तनाबूद किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि ये आतंकी कहां से और कब हिंदुस्थान में दाखिल हुए थे। वर्ष २०१६ में नगरोटा में हुए आतंकी हमले और वर्ष २०१८ में जम्मू के सुंजवां में हुए एक अन्य आतंकी हमले में शामिल आतंकियों के प्रति भी अभी तक जो जानकारी उपलब्ध हुई है वह भी सिर्फ अंदाजे पर ही की गई है। पुलिस महानिदेशक ने दावा किया था कि वे जम्मू प्रâंटियर के सेक्टरों से घुसे थे और उन्होंने कई किमी का सफर किया था। इस सच्चाई के बावजूद कि उन्होंने ८८ किमी के सफर में ४२ नाकों को पार किया था, जबकि १९ नवंबर २०२० को हुए हमले में शामिल आतंकियों को कश्मीर ले जा रहे ट्रक चालक ने यह बयान देकर पुलिस के ही दावों पर शंका पैदा कर दी थी। उसका कहना था कि आतंकियों को सांबा में चीची माता के बाहर से राजमार्ग से बिठाया था और यह पिकअप प्वाइंट हीरानगर से २० किमी की दूरी पर था।
जम्मू-कश्मीर में हिंसा में आई तेजी
पिछले चार महीने से कश्मीर में हिंसा में तेजी आई है। आंकड़ों से यह पता चलता है कि इस अवधि में करीब ६ दर्जन हमलों को अंजाम आतंकी दे चुके हैं और १३ लोगोंं को भी मौत के घाट उतारा जा चुका है तथा ३२ हथगोलों के हमले भी हो चुके हैं। इस दौरान १४ सुरक्षाकर्मी शहीद भी हो चुके हैं। अधिकतर हमले, हत्याएं दक्षिण कश्मीर में हुई हैं। दक्षिण कश्मीर में ही अमरनाथ यात्रा होती है और अभी तक मारे गए ६४ आतंकियों में से आधे से अधिक दक्षिण कश्मीर में ही मारे गए हैं। दरअसल भीषण गर्मी के कारण इस बार एलओसी पर बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण, घुसपैठ का खतरा भयानक रूप से मंडराने लगा है।

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