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कहां गायब हो गए गडकरी!.. महायुति की सभा में नहीं आए नजर… सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म

सामना संवाददाता / मुंबई

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है और आज मतदान होगा। लोकसभा चुनाव नतीजों को लेकर कई तरह के तर्क-वितर्क किए जा रहे हैं। इस साल बीजेपी के सामने इंडिया गठबंधन की कड़ी चुनौती है। इसीलिए बीजेपी ने कई भ्रष्ट नेताओं को वॉशिंग मशीन में धोकर पार्टी में शामिल किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने हाल ही में ऐसा बयान दिया कि राजनीति के गलियारे में खलबली मच गई। उन्होंने कहा कि हम अब सक्षम हैं और अपने तरीके से पार्टी का विकास कर रहे हैं और पहले हमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जरूरत थी, अब हम अपनी पार्टी चला रहे हैं। इस बयान के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर बीजेपी-आरएसएस संबंधों की चर्चा शुरू हो गई। इस चर्चा में एक और मुद्दा शामिल हो गया है नितीन गडकरी किसके साथ हैं। हाल ही में मुंबई के शिवतीर्थ में महायुति की एक बहुप्रचारित सभा आयोजित की गई थी। जैसे ही लोगों ने इस सभा से मुंह मोड़ा। महायुति के नेताओं में निराशा छा गई। साथ ही इस सभा में बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी की भी अनुपस्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस सभा में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही है। नितिन गडकरी को एक स्पष्टवादी व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी पार्टी और नीतियों के खिलाफ जमकर अपनी राय व्यक्त की थी। इसलिए ऐसी चर्चा है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह उनसे नाराज हैं। राजनीतिक हलकों में इस बात की भीr खूब चर्चा थी कि उम्मीदवारों की पहली सूची में गडकरी का नाम क्यों नहीं था।
चूंकि गडकरी नागपुर से आते हैं, इसलिए संघ के साथ उनके करीबी रिश्ते हैं। साथ ही २०१९ में प्रधानमंत्री पद के लिए संघ की ओर से नितिन गडकरी के नाम पर भी चर्चा चल रही थी। हालांकि, पुलवामा और अन्य राजनीतिक घटनाओं के कारण मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री पद मिल गया। इसके बाद गडकरी को राष्ट्रीय स्तर पर बाहर कर दिया गया। गडकरी कई बार पार्टी और उसकी नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर जाहिर कर चुके हैं। जब संघ द्वारा उनका नाम प्रधानमंत्री पद के लिए लिया जा रहा था तो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में घबराहट बढ़ रही थी। इसके चलते सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी कि गडकरी को हटाया जा रहा है।
साथ नजर नहीं आए मोदी-गडकरी
२०१९ के बाद गडकरी और मोदी को एक साथ कम ही देखा गया। वरिष्ठ, अनुभवी और मेहनती मंत्री होने के बावजूद, गडकरी को राष्ट्रीय राजनीति में किनारे कर दिया गया। इससे ऐसी चर्चा है कि मोदी और गडकरी में नहीं बनती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों ने यह भी राय व्यक्त की है कि जिन गडकरी का नाम हमेशा प्रधानमंत्री पद के लिए लिया जाता रहा है, उनका महागठबंधन के प्रचार अभियान के समापन समारोह में उपस्थित नहीं होना बहुत कुछ कहता है। संघ की ओर से इस साल भी प्रधानमंत्री पद के लिए गडकरी का नाम आगे बढ़ाए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री पद के लिए संघ की पहली पसंद गडकरी हैं, ऐसी चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। बहरहाल, अब सबकी नजर बीजेपी और संघ के रिश्ते और लोकसभा चुनाव के नतीजों पर है।

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