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व्हिप लाचारों के हाथ में नहीं शिवसैनिकों के हाथ में शोभा देता है! -उद्धव ठाकरे शिवसेना का चुनाव आयोग के खिलाफ मुकदमा

‘शिवसेना को खरीदा नहीं जा सकता है, ये ध्यान रखो। शिवसेना यह हमारी ही है। व्हिप भी हमारा ही होगा। व्हिप का मराठी अर्थ चाबुक है। चाबुक लाचारों का नहीं, बल्कि शिवसेनाप्रमुख का और उनके शिवसैनिकों का ही चलेगा।’

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल वर्ली स्थित एनएससीआई डोम सभागार में महापत्रकार परिषद लेकर विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर द्वारा विधायक अयोग्यता मामले में दिए पैâसले की जनता के दरबार में सबूतों के साथ चीरफाड़ की। इस दौरान २०१३ में शिवेसना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारित हुए प्रस्ताव, घोषणाएं, उस संबंध में चुनाव आयोग को दिए गए कागजातों का वीडियो और सबूत भी पेश किए गए। उद्धव ठाकरे ने इस दौरान नार्वेकर और घातियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि हिम्मत है तो पुलिस सुरक्षा एक तरफ रखकर मेरे साथ जनता के समक्ष आओ और बोलो, शिवसेना किसकी है? फिर किसे स्वीकारेंगे, किसे गाड़ेंगे और किसे रौंदेंगे, यह जनता तय करेगी। सत्ता आती और जाती है, मैं तैयार हूं। अब चुनाव कराओ, मैं मशाल लेकर आता हूं और घातियों को मेरे चुराए गए धनुष बाण को ले जाने दो, हो जाने दो, ऐसी ठाकरी शैली भी उद्धव ठाकरे ने इस दौरान दिखाई।
इस दौरान उद्धव ठाकरे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सचमुच टूट पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह झूठे ने जो पैâसला दिया, यानी ट्रिब्यूनल ने जो पैâसला दिया, उसके खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आशा है ही, लेकिन आज लोकतंत्र के मूलभूत घटक जनता के न्यायालय में हम आए हैं, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

(कोट)
जिस महाराष्ट्र में रामशास्त्री पैदा हुए, संविधान लिखनेवाले बाबासाहेब आंबेडकर पैदा हुए, उस मिट्टी में नार्वेकर जैसे नाकारा का जन्म हुआ है। लोकतंत्र के हत्यारे जन्म ले रहे हैं और उन्हें महाशक्ति साथ दे रही है। लेकिन उन्हें यह नहीं पता है कि महाराष्ट्र की मिट्टी ऐसे लोगों को गाड़ देती है और खत्म कर देती है।

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