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व्हाइट पेपर बनाम ब्लैक पेपर!

-भाजपा-कांग्रेस में शुरू हुआ पेपर वॉर…कांग्रेस फोबिया से नहीं उबर पा रही केंद्र सरकार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

केंद्र की मोदी सरकार के काले कारनामों को लेकर विपक्ष आक्रामक हो गया है। विपक्ष ने गुरुवार को केंद्र सरकार के १० साल के अन्याय काल का पूरा काला चिट्ठा अर्थात ब्लैक पेपर जारी किया। मोदी सरकार के बड़े-बड़े झूठे वादे और जनता को ठेंगा दिखाने की प्रवृति को कांग्रेस ने उजागर किया है। उधर केंद्र सरकार की ओर से भी व्हाइट पेपर जारी करने की घोषणा की गई है। सत्ता पक्ष-विपक्ष दोनों आमने-सामने हो गए हैं। दोनों के बीच अब ब्लैक पेपर और व्हाइट पेपर वॉर शुरू हो गया है। इस बीच भाजपा अपने बेहतर कार्यों को गिनाने के बजाय कांग्रेस पर टीका-टिप्पणी तक ही सिमट जा रही है। आज भी भाजपा कांग्रेस फोबिया से उबर नहीं पा रही है।
बता दें कि भाजपा व्हाइट पेपर जारी करती कि उससे पहले कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष ने तमाम मुद्दों को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए कार्यों को लेकर जारी हुए ब्लैक पेपर में बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मूलभूत विषयों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, भाजपा के इस काल में बेरोजगारी ४५ वर्षों में सबसे अधिक पहुंच गई है। २०१२ में बेरोजगारी एक करोड़ थी, जो २०२२ में बढ़कर लगभग ४ करोड़ हो गई है। १० लाख स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। ग्रेजुएट्स और पोस्ट ग्रेजुएट्स के मामलों में बेरोजगारी दर लगभग ३३ फीसदी है। हर तीन में से एक युवा नौकरी की तलाश कर रहा है। हर घंटे दो बेरोजगार आत्महत्या कर रहे हैं। कांग्रेस ने ब्लैक पेपर में बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत से अब २० फीसदी तक गिर गई है। कीमतों में प्रति बैरल १०० डॉलर से ७९ डॉलर की कमी आई है। इसके बावजूद मोदी सरकार एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि करती रहती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताई गईं चार जातियां (गरीब, महिलाएं, युवा और किसान) पर फोकस किया है।
क्या होता है ब्लैक पेपर और व्हाइट पेपर
ब्लैक पेपर और व्हाइट पेपर का अंतर सिर्फ नाम तक सीमित नहीं है। एकेडमिक, सरकार और संगठन के लिहाज से उनका अलग-अलग इस्तेमाल होता है। ब्लैक पेपर के जरिए किसी टॉपिक, मुद्दे या नीति की आलोचना करते हुए राय जाहिर की जाती है, यह बनी-बनाई धारणाओं को चुनौती देनेवाला दस्‍तावेज होता है। इसमें विवादित विषयों को उठाया जाता है, सबूत पेश किए जाते हैं और वैकल्पिक रास्ते पेश किए जाते हैं। व्हाइट पेपर में किसी खास विषय पर विस्तार से जानकारी, एनालिसिस और प्रस्ताव शामिल होते हैं। सामान्‍य तौर पर सरकार, संगठन या विशेषज्ञ ‘श्वेत पत्र’ जारी करते हैं।
१० साल, अन्याय काल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ५७ पेज का ब्लैक पेपर जारी करते हुए इसे १० साल, अन्याय काल नाम दिया है। कांग्रेस ने सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर उनकी विफलताएं छिपाने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि ऐसे में इस सरकार के खिलाफ ब्लैक पेपर लाने का पैâसला किया गया। कांग्रेस ने यह ब्लैक पेपर ऐसे समय जारी किया है, जब केंद्र सरकार ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के १० साल के कार्यकाल पर एक श्वेत पत्र जारी करने की घोषणा की है। कांग्रेस ने अपने इस ब्लैक पेपर में मोदी सरकार के १० साल में युवाओं, महिलाओं, किसानों, अल्पसंख्यकों और श्रमिकों पर हुए अन्याय का जिक्र किया है।

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