मुख्यपृष्ठनए समाचारवो कौन थी? ... मोनोलिसा की मुस्कान की अनदेखी दास्तां

वो कौन थी? … मोनोलिसा की मुस्कान की अनदेखी दास्तां

मनमोहन सिंह

१५१०: इटली। फ्लोरेंस का सांता मारिया नुओवा अस्पताल…
एक अस्त-व्यस्त लंबे बालों और लंबी दाढ़ी वाला इंसान अस्पताल के मोर्चरी में शव का चीर-फाड़ कर रहा था। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की चीर-फाड़कर वह उनके स्कैच भी तैयार कर रहा था। वह कोई डॉक्टर नहीं था, लेकिन वहां के सम्राट ने उसे यह एक विशेषाधिकार दिया था। आज उसके सामने एक महिला का सिर रखा हुआ था। वह उसके मुंह विशेषकर होंठ की मांसपेशियों का अध्ययन कर रहा था। उसने होंठ और उसके अगल-बगल की सबसे ऊपर ही त्वचा को हटा दिया था। अब वह होठों की मांसपेशियों का अध्ययन करने लगा। मांसपेशियों की एक परत फिर और एक परत, उन्हें काटता और फिर उनके स्कैच बनाता। अब चेहरे की अन्य मांसपेशियों की बारी थी। दोनों तरफ के गालों को उसने स्लाइस के तौर पर काटा, फिर वहां की मांसपेशियों का गौर से निरीक्षण किया। अब एक और स्कैच तैयार हो गया था। अब उन्हें रंगना भी था रंगों का संयोजन किस तरह से हो आदि विषयों पर भी वह नोट तैयार कर रहा था। साल गुजर गया वह शख्स इस तरह अपने प्रयोग में लग रहा। उसने बहुत सारे स्कैचेज तैयार कर दिए थे।
ये थे लियोनार्डो दा विंची, लियोनार्डो डि सेर पिएरो दा विंची। इटली के बहुआयामी, प्रतिभाशाली शख्स। एक चित्रकार, एक ड्रॉफ्ट्समैन, एक इंजीनियर, एक वैज्ञानिक, एक सिद्धांतकार, एक मूर्तिकार और एक आर्किटेक्ट। उन्होंने शरीर रचना विज्ञान, खगोल विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, मानचित्र कला, चित्रकला और जीवाश्म विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर चित्र और नोट्स बनाए।
खैर, अब वापस लौट आते हैं उनके स्टूडियो में, जहां पर उनके सामने एक पेंटिंग रखी हुई है। इस पेंटिंग की शुरुआत उन्होंने तकरीबन १५०३ में की थी। यह पेंटिंग थी लोजा गिरादिनी की! एक खूबसूरत महिला थी, जिनके पति थे प्रâांसिस्को गोवा कोंडो। वह जाने-माने सिल्क के व्यापारी थे। उन्होंने लियोनार्दो विंची को कमीशन किया था, अपनी पत्नी की पेंटिंग बनाने के लिए। उन्होंने इस पेंटिंग पर काम शुरू किया, लेकिन उन्हें यह पेंटिंग अधूरी-सी लगी। उन्होंने वादा किया कि वह इस पेंटिंग को पूरा करेंगे। उस पेंटिंग को लगभग आधी छोड़कर फिर अपने और कामों में उलझ गए। इस बीच उन्होंने और कोई पेंटिंग्स बनाई, स्कल्पचर्स बनाए, कलाकृतियां बनार्इं, किताबें लिखीं और बहुत सारा रिसर्च किया। उनके दिमाग से वह तस्वीर ही नहीं हट रही थी। वह चाहते थे कि उसे तस्वीर को वे एक मुकम्मल रूप दें। इस बीच उन्होंने उस तस्वीर पर काम भी किया था कई वर्षों के अंतराल में।
यह वर्ष था १५१३। उन्होंने उसे पेंटिंग के साथ कुछ एक्सपेरिमेंट किया। उन्हें पता था कि होठों के मसल्स मुस्कुराते समय किस तरह रूप लेते हैं। उन्होंने इस बीच यह भी अध्ययन कर लिया था कि कौन से रंग और उनका कौन-सा शेड किस अनुपात में चेहरे की मुस्कान को जीवित कर देता है। प्रकाश और छांव के परिप्रेक्ष्य में रंगों का संयोजन और बहुत सारी गहराइयां। सब कुछ उन्होंने उसे तस्वीर को बनाने में उड़ेल दिया था। ४ साल और बीत गए थे, तकरीबन यह तस्वीर अब पूरी हो चुकी थी। यह वह तस्वीर थी जो आनेवाले भविष्य में उनके नाम को हमेशा के लिए अमर कर देने वाली थी। उस तस्वीर की मुस्कान को देखकर लोग कयास लगाते रह जाते थे। उसे तस्वीर में मुस्कुराती उस महिला की रहस्यमयी मुस्कान ने आज तक दुनिया को आकर्षित कर रखा है। विंची द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग को दुनिया की सबसे कीमती पेंटिंग्स माना जाता है।
हालांकि, इस तस्वीर को लेकर बहुत सारे दावे किए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना था कि वह महिला एक चरवाहा थी, कुछ लोगों का कहना था कि यह महिला उस जमाने में किसी रईस की फियान्सी थी। कुछ लोगों ने कयास लगाया कि यह उनकी मां की पेंटिंग थी और एक बंदे ने तो यहां तक कह दिया था कि यह खुद उनकी पेंटिंग थी। वह खुद ही देखना चाहते थे कि अगर वह महिला होते तो किस तरह दिखाई देते।
मोनालिसा नाम कैसे पड़ा?
उस पेंटिंग्स का नाम मोनालिसा क्यों पड़ा? मडोना लिसा इटली में महिलाओं के लिए मैडम की जगह मैडोना शब्द का प्रयोग किया जाता है। अंग्रेजी में मैडम लिसा और मैडम से फिर मोनालिसा! तो उनका नाम ही मैडम लिसा यानी मैडोना लिसा यानी मोनालिसा पड़ा गया।

 

अन्य समाचार