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किसे बचा रही एसबीआई? … चुनावी बॉन्ड से जु़ड़ा डेटा किया डिलीट!

सामना संवाददाता/ नई दिल्ली
चुनावी बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए केंद्र सरकार और एसबीआई बैंक अपनी गलतियों को छुपाने में जुटे हैं। इसी के तहत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी वेबसाइट से चुनावी बॉन्ड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हटा दिए हैं। बैंक के इस कदम को अब बड़े संदेह की नजर से देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनावी बॉन्ड के नाम पर धांधली करनेवाले राजनीतिक दलों के बचाव में बैंक ने यह कदम उठाया है। ऐसे में यह सवाल खड़े होते हैं कि आखिर एसबीआई किसे बचाने के लिए ऐसा कदम उठाया है।
बता दें कि बैंक ने यह घटनाक्रम तब किया है जब बैंक ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए चुनावी बॉन्ड का विवरण जमा करने के लिए ३० जून तक का समय कोर्ट से मांगा है। एसबीआई बैंक के वेबपेज या वेबसाइट पर बदलाव किए जाने का दावा एक संस्थान ने किया है। संस्थान के अनुसार, उनमें चंदा देने वालों के लिए ऑपरेटिंग दिशा-निर्देश और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न या एफएक्यू वाले वेबपेज शामिल नहीं हैं। जैसे कि कौन चुनावी बॉन्ड खरीद सकता है? चुनावी बॉन्ड किस मूल्यवर्ग में उपलब्ध थे, चुनावी बॉन्ड खरीदने के लिए कौन से दस्तावेज आवश्यक थे?
बैंक टीम पर गंभीर आरोप
आरोप है कि एसबीआई ने बॉन्ड को भुनाने की समय-सीमा समाप्त होने के ४८ घंटों के भीतर देशभर से चुनावी बॉन्ड पर डेटा जमा किया और वित्त मंत्रालय को इसकी जानकारी दी। दिलचस्प बात यह है कि चुनावी बॉन्ड से संबंधित काम, मुद्रण से लेकर भुनाए जाने तक की देख-रेख एसबीआई की एक विशिष्ट टीम द्वारा की जाती थी, जिसे पहले ट्रांजेक्शन बैंकिंग यूनिट (टीबीयू) कहा जाता था। इस टीम ने कई अवसरों पर शॉर्ट नोटिस पर सरकार के लिए जानकारी एकत्र की है और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को चुनावी बॉन्ड के ट्रेंड्स के बारे में सूचित किया है।

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