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किस किस को अब प्यार करें हम

किस किस को अब प्यार करें हम।
किसको करें सलाम।
सब कोई अपने में डूबे।
सबके अपने काम।।
मोबाइल में लोग डटे हैं।
हरदम सुबहो शाम।।
स्वारथ ने अब छीन लिया है।
लोगों का आराम।।
सत्य बोलना भी मुश्किल है।
बोलो सीता राम।।
राजनीति ने कर डाला है।
सारा चक्का जाम।।
पर्यावरण प्रदूषण कहता।
होगा काम तमाम।।
कहां छिपा है किस जंगल में।
अपना लाल सलाम।।
पूछ रहा है घायल प्राणी।
कब होगा आराम।।
अंधेरे ने हमको मारा।
धूप मिला न घाम।।
सोच रहे हैं व्याकुल मन से।
कहां करें विश्राम।।
किस किस को अब प्यार करें हम।
किसको करें सलाम।।
अन्वेषी

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