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सरकार ने काशी में सैकड़ों मूर्तियां क्यों तोड़ी? … शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा सवाल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
आगामी २२ जनवरी को अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा के मुहूर्त को लेकर आए दिन चारों शंकराचार्यों ने मुहूर्त को लेकर केंद्र सरकार से बार-बार सवाल उठाए हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सभी चारों मठों के शंकराचार्य शामिल नहीं हो रहे हैं। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उद्घाटन में शामिल न होने का कारण धार्मिक ग्रंथों का पालन न करना बताया। उन्होंने कहा है कि मंदिर का निर्माण पूरा होने से पहले अभिषेक करके धर्मग्रंथों को कमजोर किया जा रहा है। शंकराचार्यों का मानना है कि श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा शुभ मुहूर्त पर नहीं किया जा रहा है। इसके मुहूर्त को लेकर केंद्र सरकार सवालों से घिरी नजर आ रही है। इसी बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में बने काशी कॉरिडोर को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि काशी कॉरिडोर बनाने के दौरान कई हजार साल पुरानी मूर्तियों को तोड़ दिया गया है। सरकार ने काशी में सैकड़ों मूर्तियां तोड़ी हैं। उसका हम विरोध करते हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि हमने अपनी आंखों से देखा, ऐसा लग रहा था कि अभी-अभी महाभारत हुआ है। किसी का हाथ कटा तो किसी का गला कटा है। वो दृश्य हमने देखा है तो हमने इसका विरोध किया। जो गलत होता है, उसके लिए हम कहते हैं और कहते रहेंगे। काशी कॉरिडोर को लेकर सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने काशी में मंदिर तोड़े, सिर्फ मंदिर ही नहीं दो-दो हजार साल, पंद्रह सौ साल, हजारों साल पुरानी मूर्तियों को तोड़कर उन्हें जब मलबे में फेंका तो हमसे नहीं देखा गया।
अच्छा बनाना जरूरी, लेकिन हत्या सही है क्या?
शंकराचार्य ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा कि एक मूर्ति की पूजा करने के लिए १० मूर्तियों को तोड़ दें क्या? एक मूर्ति का महत्व बढ़ाने के लिए १० मूर्तियों को तोड़कर कहें कि हमने अच्छा काम किया, ये हम स्वीकार नहीं करते हैं। वो दृश्य हमने अपनी आंखों से देखे हैं कि हमारे देवताओं की मूर्तियां पड़ी हैं। चारों तरफ छिटक रही थीं, हमसे वह नहीं देखा गया। बता दें काशी विश्वनाथ मंदिर का विकास करने के लिए सरकार की ओर से कॉरिडोर योजना के तहत विकास किया गया।
कब रुकेंगी गोहत्या?
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि `प्रभु राम को लाने वाली गाय माता का ही आज वध किया जा रहा है। यह दुर्भाग्य की बात है कि इसे रोका नहीं जा पा रहा है। हम भगवान श्रीराम के सामने किस मुंह से खड़े होंगे।’ उन्होंने आगे कहा कि `विधि-विधान के साथ शिखर बनने के बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो हम जरूर अयोध्या जाएंगे। अपने प्रण की रक्षा करते हुए सारे कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे मगर भगवान के सामने नहीं जाएंगे। वह तब जाएंगे जब गोहत्या बंद हो जाएगी। अगर २२ जनवरी २०२४ को ही कार्यक्रम करने की उनकी जिद है, तब कम से कम गोहत्या बंदी की घोषणा कर दी जाए।

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