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ईडी भाजपा नेताओं के पीछे क्यों नहीं लगती

सामना संवाददाता / मुंबई- मराठा-ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र का माहौल गरमाया हुआ है। दूसरी ओर ऐसा लगता है कि देशभर में विपक्षी नेताओं को परेशानी में डालने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। विपक्षी दल लगातार इसके खिलाफ आवाज उठा रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल केवल विपक्षी नेताओं से पूछताछ करने और उन्हें जेल में डालने के लिए कर रही है। अब सत्ता पक्ष के ही एक विधायक ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। शिंदे सरकार में शामिल विधायक बच्चू कडू ने जांच एजेंसियों के कामकाज पर उंगली उठाई है। जब उनसे ईडी की कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं अब भाजपा के साथ हूं।’ लेकिन मेरा सीधा सवाल यह है कि भाजपा को इस बात का जवाब देना चाहिए कि ईडी किसी भी भाजपाई पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। इस बात को लेकर एक आम कार्यकर्ता भी आश्चर्यचकित है।

राकांपा, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और कांग्रेस नेताओं की ईडी द्वारा जांच की जा रही है, लेकिन भाजपा नेताओं की जांच नहीं हो रही है। बच्चू ने कहा कि शिंदे गुट के नेताओं की भी ईडी ने जांच की थी, लेकिन अब वे सत्ता में बैठे हैं, ऐसा उन्होंने मुंबई में एक मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में कहा। राजनीतिक लोगों में मानवता नहीं बची है। कौन मरता है। उसकी अपेक्षा हमें क्या मिलता है, उनके लिए यह महत्वपूर्ण है। इस भूमिका के कारण ईश्वर, देश, राज्य सब पीछे छूट गए हैं। महाराष्ट्र, देश डूब जाए, वह चलेगा, लेकिन झंडा हमारा लगाना चाहिए, ऐसा तंज बच्चू कडू ने आरक्षण के मुद्दे पर राजनेताओं पर कसा। आरक्षण की इस आग पर कई लोग अपनी केतली गर्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध कुनबी अभिलेख निजाम काल के हैं, लेकिन कुछ लोग गलत बयानबाजी करके लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं, ऐसा तंज कडू ने छगन भुजबल पर लगाया।

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