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आंखों में जलन, सीने में तूफान सा क्यों है… नई मुंबई की हवा ‘खराब’ प्रशासन ने बताया तकनीकी दोष

• वायरल बुखार, खांसी और सर्दी के मामलों में हुई वृद्धि
सामना संवाददाता / नई मुंबई 
तलोजा क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पिछले सप्ताह १७ अगस्त की शाम चार बजे के करीब अचानक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। आश्चर्य की बात यह है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के अधिकारी इसे कथित तौर पर तकनीकी दोष मान रहे हैं। उस दिन एक्यूआई ३०० को पार कर गया था, जो खराब वायु गुणवत्ता का संकेत है। एक सर्वेक्षण से पता चला है कि तलोजा एमआईडीसी से सटे इलाकों में वायरल बुखार, खांसी और सर्दी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थानीय निवासी लगातार सरकारी क्लिनिक की मांग कर रहे हैं। एमपीसीबी के रीजनल अफसर सतीश पडवल कहते हैं कि एयर क्वालिटी में गिरावट एक तकनीकी दोष के अलावा कुछ नहीं था। हालांकि, एमपीसीबी लगातार एयर क्वालिटी पर ध्यान रखता है।
 डेटा की समीक्षा नहीं 
जानकार बताते हैं कि राज्य सरकार ने तलोजा और कलंबोली में एक्यूआई स्टेशनों के लिए महत्वपूर्ण धन आवंटित किया। बावजूद उनके डेटा की समीक्षा नहीं की जा रही है। खारघर और तलोजा के निवासी एमपीसीबी से औद्योगिक इकाइयों के कारण खराब वायु गुणवत्ता के बारे में शिकायत करते रहते हैं। प्रदूषण के मामले में लंबे समय से लड़ रहे अरविंद म्हात्रे कहते हैं कि अब आधिकारिक एक्यूआई स्टेशनों के होते हुए एमपीसीबी इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि मानसून के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। असली वजह वह नहीं जानते हैं, इस पर विश्वास करना ही मुश्किल है।

एमपीसीबी से की गई शिकायत 
कलंबोली और तलोजा में दो स्टेशनों पर खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स रीडिंग के साथ-साथ इन इलाकों में लंबे समय से खांसी, बुखार और सिरदर्द के मामलों में काफी बढ़त देखी गई। एक स्थानीय प्रतिनिधिमंडल ने एमपीसीबी से इस बात की शिकायत करते हुए १७ अगस्त की शाम को हवा की गुणवत्ता में अचानक गिरावट के कारण की जांच करने का अनुरोध किया।

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