मुख्यपृष्ठनए समाचारमालदीव पर अब भी मेहरबानी क्यों?

मालदीव पर अब भी मेहरबानी क्यों?

हिंदुस्थान विरोधी नीति अपनाने वाले देश को इस बार भी ६०० करोड़ की सहायता देने की तैयारी
हिंदुस्थान के दक्षिण में स्थित टापुओं वाले देश मालदीव में नए राष्ट्रपति मोइज्जू के आने के बाद माहौल काफी बदल गया है। यह देश अब हिंदुस्थान से दुश्मनी रखने लगा है। वहां से अक्सर हिंदुस्थान विरोधी बयानबाजी की जा रही है। बावजूद इसके मोदी सरकार ने दुश्मन बन चुके मालदीव पर मेहरबानी दिखाई है। ऐसे में यह सवाल किसी के मन में भी उठना स्वाभाविक है कि दुश्मन बन चुके मालदीव पर अब भी मेहरबानी क्यों?
गौरतलब है कि मालदीव को इस बजट में ६०० करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। असल में हिंदुस्थान अपने पड़ोसियों को सहायता देता आया है। मगर अच्छे पड़ोसियों को। नेपाल, श्रीलंका और भूटान को आर्थिक सहायता दी जाती है। मगर हिंदुस्थान से दुश्मनी रखनेवाला पाकिस्तान इस वर्ग में नहीं आता। अब चीन की गोद में जाकर बैठनेवाला मालदीव भी पाकिस्तान की राह पर चल पड़ा है। ऐसे में उसे आर्थिक सहायता देने का कोई तुक नहीं बनता। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू के हिंदुस्थान विरोधी बयानों के चलते यहां देश के आम नागरिकों में काफी गुस्सा है। हालांकि, पहले के मुकाबले सहायता राशि कुछ घटा दी गई है। मगर होना तो यह चाहिए था कि सहायता बंद कर देनी चाहिए थी। वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार २०२४-२५ में मालदीव को ६०० करोड़ की सहायता देगी। हालांकि इसमें २२ फीसदी की कमी की गई है। इससे पहले लगातार सरकार मालदीव को दी जाने वाली सहायता को बढ़ा रही थी। मालदीव को दी जाने वाली आर्थिक सहायता २०२२-२३ के मुकाबले २०२३-२४ में चार गुने से भी अधिक कर दी गई थी। मालदीव को २०२२-२३ में जहां १८३ करोड़ की सहायता दी गई थी तो वहीं यह २०२३-२४ में बढ़ कर ७७० करोड़ रुपयों पर पहुंच गई थी। मालदीव के अलावा भारत नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार को भी आर्थिक मदद देता है।

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