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जलवायु परिवर्तन का व्यापक असर: लालीना और अनलीला में उलझा मौसम!

  • एक पखवाड़े पहले विदा हो जाएगा मानसून

सामना संवाददाता / मुंबई
इस साल मानसून ने अपने निर्धारित समय से दो दिन पहले दस्तक दी लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने मौसम पर असर डाला। देश में कहीं जबरदस्त बारिश हुई तो कहीं सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। लालीना और अनलीला के मध्य काल में बने मौसम के मिजाज से मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल सामान्य बारिश का पूर्वानुमान लगाया था और कृषि के अनुकूल बारिश होने की भविष्यवाणी की थी। हालांकि अब कहा जा रहा है कि एक पखवाड़े पहले मानसून अलविदा कह देगा।
मुंबई में जुलाई महीने में जबरदस्त बारिश हुई लेकिन इसके बाद मौसम की आंख-मिचौली जारी है। धूप-छांव के बीच मध्यम व हल्की बारिश जारी है। ठाणे और पालघर में भी ऐसा ही हाल है। खैर, राहत की बात है कि जुलाई महीने में हुई बारिश से मुंबई में जलापूर्ति करनेवाली झीलें लबालब भर गई हैं। मुंबई व उपनगर में पानी का टेंशन नहीं है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। खासकर, विदर्भ और मराठवाड़ा में कृषि फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि राज्य में औसत से ज्यादा बारिश हुई है। बाढ़ से १८ लाख २१ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। इसमें १७ लाख ५९ हजार ६३३ हेक्टेयर में खेती, २५ हजार ४७६ हेक्टेयर में बागवानी और ३६ हजार २९४ हेक्टेयर में फल फसल शामिल हैं। अब तक २१ हजार बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
अनाज उत्पादन पर पड़ेगा असर
देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के हालात रहे। कहीं जबरदस्त बारिश हुई तो कहीं सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में कृषि उपज को बहुत नुकसान पहुंचा है। इसका असर अनाज उत्पादन पर पड़ेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून सितंबर के पहले सप्ताह में ही अपनी वापसी की यात्रा शुरू कर देगा। अमूमन मानसून की वापसी १७ सितंबर से शुरू होती है और ३० सितंबर तक मानसून विदाई लेता है। इस साल मानसून के १५ दिन पहले जाने की संभावना जताई जा रही है। पिछले साल मानसून ने छह अक्टूबर को वापसी की थी। देश में इस साल अच्छा मानसून औसत रहा लेकिन उत्तर भारत के कुछ राज्यों में औसतन कम बारिश होने के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश में बारिश कम होने से धान की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस साल उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है।

 

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