मुख्यपृष्ठनए समाचारसीरो सर्वे बताएगा... चौथे डोज की जरूरत पड़ेगी क्या?

सीरो सर्वे बताएगा… चौथे डोज की जरूरत पड़ेगी क्या?

•  तीन हजार कर्मचारियों का होगा टेस्ट
•  ढूंढ़ेंगे कोरोना की काट

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई । कोरोना को टक्कर देने के लिए मुंबई महानगरपालिका पूरी तरह से मुस्तैद है। इसके तहत तीन चरणों में छठा सीरो सर्वे कराने जा रही है। सीरो सर्वे बताएगा कि नागरिकों को चौथे डोज की जरूरत है या नहीं? इसी से मनपा कोरोना की काट ढूंढ़ने का प्रयास करेगी। इस सीरो सर्वे में ३ हजार स्वास्थ्यकर्मियों और प्रâंटलाइन वर्कर्स के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वैक्सीनेशन के बाद लोगों के शरीर में एंटीबॉडी का स्तर कितना घटा, बढ़ा या स्थिर है। इतना ही नहीं यह सीरो सर्वे आगे की रणनीति भी तय करेगा। मनपा के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकाणी ने कहा कि इसी महीने से ब्लड सैंपल के कलेक्शन शुरू कर दिए जाएंगे।
अतिरिक्त आयुक्त काकाणी ने कहा कि वैक्सीनेशन अभियान को एक साल पूरे होने पर सीरो सर्वे कराया जाने वाला था। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर से सीरो सर्वे नहीं हो सका था।
अब जबकि तीसरी लहर कंट्रोल में है तो मनपा फिर से सीरो सर्वे करा रही है। सीरो सर्वे में पहली बार सैंपल इकट्ठा किए जाने के बाद तीसरे और नौवें महीने में फिर से इस प्रक्रिया को दोहराया जाएगा।
ऐसे जुटाए जाएंगे ब्लड सैंपल
काकाणी ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों के सैंपल अस्पतालों और प्रâंटलाइन वर्कर्स के सैंपल पूरे २४ वॉर्ड से जमा किए जाएंगे। पहले जमा किए सैंपल के सीरो सर्वे की रिपोर्ट एक माह के भीतर आ जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सीरो सर्वे में हमारा ध्यान केवल भीड़ के बीच हर्ड इम्युनिटी का पता लगाने की बजाय ब्रेकथ्रू संक्रमण के कारणों का पता लगाने पर होगा। मुंबई में वैक्सीन लेने के बाद भी ब्रेकथ्रू का संक्रमण तेजी से बढ़ा है। बीते एक वर्ष में कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके लोगों में से १.८९ फीसद से अधिक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। जबकि पहली खुराक ले चुके ०.२२ फीसद से अधिक लोगों को कोरोना हुआ है। संक्रमित होनेवालों में युवा वर्ग की संख्या सबसे अधिक रही है। काकाणी ने बताया कि वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमित होने की वजह विभिन्न बीमारियों से लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना और बुजुर्गों के को-मॉर्बिड होना है। इसके साथ ही मास्क न पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करना आदि भी इन कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी भी ब्रेकथ्रू संक्रमण के शिकार हो चुके हैं।

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