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भाजपा को भारी पड़ेगी मदमस्ती! मुंबई, महाराष्ट्र देख रहा है केंद्र-गुजरात की दादागिरी

 फडणवीस, पाटील, सोमैया, राणे से निष्ठावान भाजपाइयों में डर!
सामना एंकर/जितेंद्र मल्लाह। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ भाजपाई नेता नितिन गडकरी ने कहा था कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सशक्त विपक्ष जरूरी है। इसके लिए गडकरी ने कांग्रेस के फिर से सशक्त बनने की दिली इच्छा व्यक्त की और कांग्रेसियों से पूरी निष्ठा से कांग्रेस को मजबूत बनाने की अपील की थी। इसी के साथ गडकरी ने ये भी याद दिलाया था कि सत्तापक्ष को विपक्ष का खासकर हारे हुए प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का सम्मान करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का उदाहरण देते हुए कहा कि नेहरू हारे हुए वाजपेयी का बेहद सम्मान करते थे।
जाहिर तौर पर गडकरी की ये बातें उनकी उदारता का प्रमाण तो हैं ही लेकिन इस तरह से उन्होंने कांग्रेस के साथ भाजपाइयों को भी आईना दिखाने का प्रयास किया है, ऐसा कहा जा सकता है। क्योंकि वर्तमान में जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां विपक्षी दल के लोगों को कीड़ा-मकोड़ा समझा जा रहा है और जिन राज्यों में गैर भाजपाई सरकार है, वहां के भाजपाई लोग केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से मदमस्ती का नंगा नाच कर रहे हैं। प. बंगाल और महाराष्ट्र इसका बड़ा उदाहरण है। महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी (मविआ) सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने पद उस समय संभाला था, जब पूरी दुनिया में वैश्विक महामारी कोविड-१९ के कहर की शुरुआत हुई थी। तबसे मुंबई, महाराष्ट्र सहित पूरा देश और दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है लेकिन इस विषम काल में भी फडणवीस के नेतृत्व में राज्य के भाजपाई नेताओं आघाड़ी सरकार को परेशान करने व बदनाम करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा।
जैसा कि सुशांत सिंह राजपूत खुद्कुशी प्रकरण के बाद देखने को मिला था। तब एनसीबी को हथियार बनाकर भाजपा ने मुंबई और महाराष्ट्र को बदनाम करने की कोशिश की लेकिन मुंह के बल गिर गए। अब विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस और किरीट सोमैया ऐसा ही प्रयास ईडी को शस्त्र बनाकर कर रहे हैं। फडणवीस ‘फर्जी’ पेन ड्राइव से सनसनी पैâलाने की कोशिश करते हैं तो सोमैया सुर्खियों में बने रहने के लिए लगभग रोज ही मविआ सरकार के किसी-न-किसी नेता के यहां ईडी, आयकर विभाग की छापेमारी व जेल जाने की भविष्यवाणी करते हैं। हैरानी तब होती है जब फडणवीस, सोमैया की भविष्यवाणी के अनुसार केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई भी होती है। मानों फडणवीस और सोमैया इन जांच एजेंसियों के प्रमुख हों। इसकी वजह से कभी साथी रही शिवसेना और भाजपा के रिश्तों में कटुता चरम पर पहुंच गई है। इससे पुराने व निष्ठावान भाजपाई आहत हैं लेकिन मोदी-शाह के राज में बढ़े फडणवीस के कद के आगे वे कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। फडणवीस ने गिरीश महाजन, चंद्रकांत पाटील, रावसाहेब दानवे, चंद्रशेखर बावनकुले, आशीष शेलार सहित बाहर से आयातीत नारायण राणे, प्रवीण दरेकर, प्रसाद लाड, कृपाशंकर सिंह जैसे समर्थकों की अपनी अलग फौज खड़ी कर ली और अपने प्रतिद्वंद्वियों को एक-एक कर हासिए पर पहुंचा दिया। एकनाथ खडसे, विनोद तावडे, मुंडे, महाजन परिवार के लोगों की पार्टी में हैसियत से इसे समझा जा सकता है।
मोदी-शाह के आशीर्वाद के बाद फडणवीस को केंद्रीय जांच एजेंसियों की ताकत मिल गई। आयकर विभाग, ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियां भाजपा और खासकर फडणवीस के विरोधियों को चुन-चुनकर निशाना बना रही हैं। हद तो तब हो गई जब फडणवीस के खिलाफ याचिका दायर करनेवाले कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के वकील सतीश उके के नागपुर स्थित घर पर कल ईडी अचानक छापा मारने पहुंच गई। करीब ६ घंटों की पूछताछ के बाद ईडी ने एडवोकेट उके को गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बाद ईडी की नीयत पर बड़ा सवाल उठने लगा है। क्योंकि पहले फडणवीस व सोमैया ने जिन प्रवीण दरेकर, नारायण राणे, कृपाशंकर सिंह सहित कई नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत ईडी में की थी उनके खिलाफ कार्रवाई को ईडी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया क्योंकि वे अब भाजपाई बन गए हैं और अब खुद को सबसे निष्ठावान भाजपाई व फडणवीस समर्थक साबित करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन फडणवीस और सोमैया जो कुछ भी कर रहे हैं उससे खुद भाजपा के लोग ही चिंतित हैं। खासकर सोमैया ने हथौड़ा लेकर जो ड्रामा किया उसे मुंबई और महाराष्ट्र की जनता केंद्र की मोदी सरकार के दम पर गुजरात की दादागिरी के तौर पर देख रही है। ये मदमस्ती उसी तरह भारी पड़ेगी जैसी कांग्रेस के कपिल सिब्बल व मणिशंकर अय्यर जैसे कांग्रेसी नेताओं ने जन लोकपाल बिल को लेकर अन्ना हजारे व काले धन को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव के आंदोलन के समय दिखाई थी।

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