मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाकहीं उड़ जाएंगे सोख हवाओं में

कहीं उड़ जाएंगे सोख हवाओं में

गिने चुने कुछ लफ्ज लिए
दर्द के खत में बंद किए
इक दिल सम्भाला उसके लिए
इक गम मैं पाला उसके लिए
मगर हो नहीं पाए वो मेरे लिए
जो कभी सोचा नहीं, इन इशारों में
कहीं उड़ जाएंगे, सोख हवाओं में
हवा पे रौब, नजर में बेखौफ रहा
इक संग दिल के लिए सौख रहा
जवाब मिले नहीं उसके हर पल के
जो बेमतलब आंखें ठहरी थीं दो पल के
उस चाहत में दोनों की कहानी थी,
उसकी आंखों में मोती, मेरे में पानी थे,
जो कभी चाहा नहीं, इन सितारों में
कहीं उड़ जाएंगे, सोख हवाओं में
ऊंघती रही धड़कन मेरी, इक चाहत के लिए
कोई अपना भी हाथ थमेगा, कसमें वादे लिए
यही समझा था दिल से दिल तक होकर
जो मेरे दिल से टकराएंगे अपना कहकर
जो जाना नहीं इरादा उसका इन बाजारों में
कहीं उड़ जाएंगे, सोख हवाओं में…

– मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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