मुख्यपृष्ठखबरेंपीलीभीत के बिगडे़ समीकरण को साधने पहुंचेंगे मोदी

पीलीभीत के बिगडे़ समीकरण को साधने पहुंचेंगे मोदी

– वरुण को टिकट नहीं देने से जनता प्रधानमंत्री से है नाराज

– प्रधानमंत्री के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनीं पीलीभीत सीट

रमेश ठाकुर / नई दिल्ली

पीलीभीत सीट फंस गई है। वरूण गांधी के टिकट कटने से वोटरों में भयंकर नारजगी से पलड़ा गठबंधन प्रत्याशी भगवत शरण गंगवार की तरफ झुक गया है। चुनावों में भाजपा के लिए वर्षों तक आसान रही पीलीभीत की सीट का समीकरण इस बार बदला हुआ है, तभी बिखरे जनाधार को समेटने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज जितिन प्रसाद के समर्थन में वोट मांगने पहुंचना पड़ रहा है।
बता दें कि पीलीभीत के वोटर खुलकर जितिन की उम्मीदवारी को स्वीकार नहीं कर रहे। जातीय समीकरण में ठाकुर, मुस्लिम, दलित व पंजाबी वोटरों का पाला बदलने का भय भाजपा को सताने लगा है, वहीं टिकट कटने से नाराज दिल्ली में बैठे वरुण गांधी का अप्रत्यक्ष समर्थन विपक्षी उम्मीदवार को देने से स्वयं प्रधानमंत्री परेशान हैं। इसलिए उन्होंने पीलीभीत जाकर प्रचार करने का निर्णय लिया, जबकि ये सीट भाजपा के लिए सभी चुनावों में हमेशा आसान रही।

– मोदी पीलीभीत पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री
वर्ष 1984 में तत्कालीन राजीव गांधी कांग्रेस प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह के समर्थन में प्रचार करने पीलीभीत पहुंचे थे, फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में पूरनपुर तहसील में डॉ. मनमोहन सिंह ने भी एक सभा को संबोधित किया था। वहीं अब मौजूदा 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए वहां पहुंच रहे हैं। मोदी के लिए पीलीभीत की सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनीं हुई है, उन्होंने स्वयं वरुण गांधी का टिकट काटा है। इसलिए पीलीभीत को जीतना उनके लिए नाक का सवाल बना हुआ है।

– पीलीभीत की जनता जितिन से है अपरिचित?
पीलीभीत से जब जितिन की उम्मीदवारी की घोषणा दिल्ली से हुई, तो सभी चौंक गए। उनका इस जिले से राजनीतिक वास्ता कभी नहीं रहा। उनका परिवार पड़ोसी जिले शाहजहांपुर से तीन दशकों से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता रहा। खुद जितिन प्रसाद राहुल गांधी के बेहद करीबी रहे। मोदी लहर में जितिन सभी चुनाव हारे तो उन्होंने पाला बदला, कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए। इसलिए भाजपा के खाटी वोटर भी खासे असहज हैं। जबकि इस दफे स्थानीय कद्दावर नेताओं में राज्य मंत्री संजय गंगवार, पूर्व मंत्री विनोद तिवारी, गुरुभाग सिंह व अन्य नेताओं ने भी अपनी उम्मीदवारी पेश की थी, जिसे हाईकमान ने नकार दिया था। इनके समर्थक गुट भी अंदरखाने नाराज हैं।

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