मुख्यपृष्ठनए समाचार‘शहीदों का बलिदान नहीं जाने देंगे व्यर्थ'-पाटिल

‘शहीदों का बलिदान नहीं जाने देंगे व्यर्थ’-पाटिल

सामना संवाददाता / मुंबई
राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने कहा कि मुंबई की विकास योजना का काम केंद्र के नीति आयोग को सौंपना महाराष्ट्र के महत्व को कम करने का प्रयास है। केंद्र का यह पैâसला मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की चाल है। किसी भी हालत में मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं होने दिया जाएगा। मुंबई को महाराष्ट्र में बनाए रखने के लिए हम कोई भी कीमत चुकाएंगे।’ शहीदों के बलिदान से महाराष्ट्र और मुंबई का एकीकरण हुआ है। हम इस बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे’, ऐसा जयंत पाटील ने इस मौके पर मीडिया से बातचीत में कहा। जयंत पाटील ने आगे कहा कि पहले के समय में योजना आयोग होता था। अब वही नीति आयोग में परिवर्तित हो गया है। लेकिन ये आयोग सिर्फ मार्गदर्शक के तौर पर काम करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों की तरह पहला कदम उठाया जा रहा है। इसी तरीके से आर्थिक नब्ज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस बात से मुंबईकर सतर्क हैं। देश में मौजूदा समय में चल रही गंदी राजनीति का समर्थन करने का पैâसला राज्य सरकार ने लिया है तो समय रहते उन्हें रोकने के लिए राकांपा मुंबईकरों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, ऐसा जयंत पाटील ने कहा।

‘हिमालय के सामने सह्याद्री कभी नहीं झुका’
राकांपा नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि केंद्र सरकार धीरे-धीरे महाराष्ट्र का दिल छीनने की कोशिश कर रही है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यह सबसे तेजी से बढ़नेवाला शहर है। एक प्रगतिशील, सबसे विविधतापूर्ण शहर, जहां हर जाति, वर्ण, वर्ग, धर्म के लोग होने के बावजूद सब एक साथ रहते हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही है। हम किसी भी हालत में मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं होने देंगे। सह्याद्री ने कभी हिमालय के सामने घुटने नहीं टेके। सह्याद्री हिमालय की सहायता के लिए जाना जाता है। मुंबईकर ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सभी मराठी लोग जाग गए हैं।

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