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धरती से खत्म हो जाएगा ऑक्सीजन?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली 

कभी सोचा है कि क्या होगा अगर धरती से ऑक्सीजन ही खत्म हो जाए। यह सवाल इसलिए सामने आया है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि भविष्य में पृथ्वी का वातावरण फिर से कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में बदल सकता है। वैसे तो ऑक्सीजन पृथ्वी पर हर जगह मौजूद है, जो हर सजीव को जिंदा रखता है। पृथ्वी के वायुमंडल का लगभग २१ प्रतिशत हिस्सा बनाने वाली यह जीवनदायी गैस अनगिनत प्रजातियों के अस्तित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हमेशा ऐसा नहीं होता था। लगभग ४.५ अरब वर्ष पहले जब ग्रह का निर्माण हुआ था, तब स्थितियां बहुत भिन्न थीं। पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन और जलवाष्प की प्रधानता थी। इस बारे में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के क्रिस रेनहार्ड ने न्यू साइंटिस्ट को कुछ चौंकानेवाले फैक्ट्स बताए हैं, जिसके अनुसार ऑक्सीजन में गिरावट बहुत ज्यादा है। हम आज की तुलना में लगभग दस लाख गुना कम ऑक्सीजन की बात कर रहे हैं। प्रलय के दिन की भविष्यवाणी करने वाले वैज्ञानिकों ने शोध में कहा है कि मॉडल का अनुमान है कि वायुमंडल का डीऑक्सीजनेशन, वायुमंडलीय ओटू के आर्कियन पृथ्वी की याद दिलाने वाले स्तर तक तेजी से गिरने के साथ, संभवत: पृथ्वी में नम ग्रीनहाउस स्थितियों की शुरुआत से पहले शुरू हो जाएगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के वायुमंडल के विस्तृत मॉडल बनाए, जिसमें सूर्य की चमक में परिवर्तन और कार्बनडाईऑक्साइड के स्तर में गिरावट का विश्लेषण किया गया। कम कार्बन डाइऑक्साइड का अर्थ है पौधों जैसे कम प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीव, जिसके परिणामस्वरूप कम ऑक्सीजन होगी। यह शोध फिर से खबरों में है, क्योंकि वैज्ञानिक सौर मंडल के बाहर रहने योग्य ग्रहों की खोज कर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि वायुमंडलीय ऑक्सीजन सामान्य रूप से रहने योग्य दुनिया की स्थाई विशेषता होने की संभावना नहीं है।

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