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चंद्रमा पर घर देने का झांसा देंगे, विश्वास मत करना

खेत, घर गिरवी रखने पड़ जाएंगे! उद्धव ठाकरे ने जुमलेबाजों को जमकर धोया

सामना संवाददाता / मुंबई

गद्दार कई हुए लेकिन हिंगोली हमेशा शिवसेनाप्रमुख के, हिंदुत्ववादी विचारों के, भगवा के पीछे खड़ी रही है। अब भी कुछ गद्दार डोले दिखा रहे हैं। लेकिन उन डोलों में केवल हवा है, यह ताकत मेरे पास है। लेकिन मुझे यही बात बुरी लगती है कि अब श्रावण का महीना शुरू हो रहा है, एक-एक करके त्योहार आ रहे हैं। इसी में नागपंचमी आई। इन गद्दारों को हमने नाग देवता समझा, इनकी पूजा की लेकिन ये पलटकर डसने लगे। अब आप गांव के लोग, खेती करनेवाले लोग हैं। अगर कोई सांप पलटकर आपको काटने के लिए आया तो क्या करना चाहिए, ये आपको पता है। अरे बाबा तुझे पुंगी बजाई, दूध पिलाया वो सभी बर्बाद हो गया। हिंदुत्व का नाम और धंधे सब अंबादास ने आपके सामने रखे ही हैं। यह सब करनेवाले खुद को हिंदू कह सकते हैं, मेरा सवाल यह है? इसे हिंदुत्व मानना चाहिए क्या? मटका के अड्डे चलाने वालों को हिंदू मानना चाहिए क्या, जो अपने ही लोगों के प्रति असभ्य व्यवहार करता है? अपने लोगों से असभ्यता के साथ पेश आनेवाला यदि कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपने ही लोगों के प्रति असभ्य है, तो उसकी असभ्यता को कुचलकर दफन कर देना चाहिए, ऐसा उद्धव ठाकरे ने इस दौरान कहा।
उन्होंने आगे कहा कि बाकी किसानों के भी कई मुद्दे हैं ही। कुछ लोग अब बाहरी राज्यों से आ रहे हैं। मानों किसानों की यहां किसी को कोई परवाह ही नहीं है। यहां तक कि उनकी भाषा, हमारी भाषा में अंतर और अब आएगी किसान सरकार… किसान मेरे सामने बैठे हैं। मेरे मुख्यमंत्री रहने के दौरान मैंने जो कुछ किया था, वह आप तक पहुंचा था या नहीं? यदि इन गद्दारों ने घात नहीं किया होता तो मैं मेरे किसानों का भला करता या नहीं करता, ये उन बाहरी लोगों को बताएं। हमें बाहरी नेताओं की जरूरत नहीं। ये यदि भाजपा की सुपारी लेने का प्रयास कर रहे होंगे और भाजपा के खिलाफ वाले वोट को फोड़ने का प्रयत्न कर रहे हैं तो उन्हें कहता हूं कि पहले अपना घर संभालो, क्योंकि आपका घर सुरंग के नीचे है। आज किसान बेबस है और सरकार टालमटोल कर रही है। हमारा आज का कार्यक्रम होते हुए भी पहले एक और कार्यक्रम था। कौन सा कार्यक्रम, सरकार आपके द्वार… ठीक है? सरकार आपके द्वार, झांसा देती बहुत भारी…यह झांसा देने वाली सरकार है। झांसे ही झांसे… लेकिन मुझे ये कहते हुए शर्म आ रही है कि भारी बारिश के कारण हुए नुकसान की भरपाई यहां के किसानों को अभी तक नहीं मिली है। अब हम सूखे के कगार पर हैं। अब सूखा पड़ा है। कितनी बुआई की है आपने… मुझे यह समझ में ही नहीं आता कि किसानों का गुनाह क्या है, सरकार बदलने के बाद ये आसमानी संकट समझ सकता हूं, लेकिन गद्दारों का राज आ गया है। इस राज का संकट उससे भी बड़ा है। एक तरफ जहां प्याज उत्पादक किसान सड़क पर आ गए हैं। दूसरी ओर ये यहां और दिल्ली में बैठे माई-बाप जो कुछ किसानों के हित में है उसे कुचलने के लिए बैठे हैं, ऐसा तंज उद्धव ठाकरे ने कसा।
राज्य सरकार पर भी आलोचनाओं का चाबुक चलाते हुए उन्होंने कहा कि प्याज किसानों के मामले में सरकार को मध्यस्थता करनी चाहिए। किसानों को दो पैसे ज्यादा मिल रहे हैं, तो वह पैसा देने का काम सरकार को करना चाहिए। लेकिन साथ ही जो उपभोक्ता हैं, उन्हें उचित मूल्य पर प्याज उपलब्ध कराने का काम भी सरकार को करना चाहिए। लेकिन सरकार कुछ देखने-सुनने को तैयार नहीं है। बीच में मैंने एक खबर ऐसा पढ़ा था कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी ने मराठवाड़ा के किसानों का सर्वेक्षण किया। उस समय यह ध्यान में आया कि एक लाख से ज्यादा किसान तनाव की गर्त में हैं। किसान कड़ी मेहनत करते हैं, फसल तैयार भी होती है तो भी उसे उसका दाम नहीं मिलता। सूखा पड़ा, अतिवृष्टि हुई लेकिन मुआवजा नहीं। ये सभी निराश हुए किसान, मराठवाड़ा में एक लाख से ज्यादा हैं। इसलिए उन्होंने एक निष्कर्ष निकाला और उसे सरकार को सौंप दिया। यह बुआई पूर्व का सर्वेक्षण है। इसमें उन्होंने ऐसा कहा कि प्रत्येक किसान को बिना किसी शर्त के २५ हजार रुपए नकद दिए जाएं, ताकि इसका उपयोग वे अपनी खेती में कर सकें। रिपोर्ट सौंप दी गई, लेकिन पैसा तो मिला ही नहीं। लेकिन उस अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनी पड़ी। यह ईमानदारी से मेहनत करने वाले किसानों के नसीब में आने वाला फल है। ये ऐसी सरकार होगी तो चाटने को क्या है, डबल इंजन, ट्रिपल इंजन सरकार किसान के लिए क्या कर रही है। ट्रिपल इंजन सरकार सिर्फ हवा में झांसों की भाप को छोड़ रही है। सरकार आपके द्वार योजना केवल कागज पर…खास बात यह है कि सरकार के तौर पर देशभर में बाजार डूबने वालों का कामकाज शुरू है। मैंने पहले भी एक सभा में बोला था कि हम हिंदुत्ववादी हैं। लेकिन हमारा हिंदुत्व हृदय में राम और हाथ में काम देने वाला है। लेकिन भाजपा में जो चल रहा है, जय श्रीराम… सब उसमें अब आयाराम। मुझे भाजपा कार्यकर्ताओं पर दया आती है। मैं २५-३० साल तक उनके साथ युति में था। कई निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने परिवार की ओर देखे बिना पार्टी के विकास के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। कभी न कभी हमारा भगवा लहराएगा। भगवा लहराया और वह सिर्फ तने तक ही रहा। यह लहरा रहा है लेकिन दूसरे का ही। उनका क्या उपयोग है? ऐसे शब्दों में उद्धव ठाकरे ने भाजपा की जमकर खबर ली।
आगामी चुनाव में किए गए संभावित वादों की भी उन्होंने खबर ली। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आ रहे हैं। उसके लिए दो चीजें हो सकती हैं। एक यानी चंद्रयान चंद्रमा पर पहुंच चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से २०३० तक चंद्रमा पर घर बनाने का वादा किया जाएगा। आप सभी सरल हैं। आप क्या सोचेंगे कि नहीं मिलेगा ये पता है लेकिन ये कहेंगे दूंगा, अगर वोट दिए और घर मिल गया तो… लेकिन हकीकत में चंद्रमा पर घर दूर रहा, खेत में बना घर गिरवी रखना पड़ सकता है। दूसरा यानी पश्चिम बंगाल की सांसद महुआ मोइत्रा और कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपनी राय रखी है। मलिक ने खुलेआम कहा है कि पुलवामा की घटना एक साजिश थी, चुनाव जीतने के लिए ऐसा किया गया था। सभी हिंदुओं और देशवासियों को उनकी दूसरी संभावना को ध्यान में रखना चाहिए। वह यानी पाकिस्तान पर हमला एक दिखावा था ये पता चला, चंद्रमा पर घर ये लोग कह सकते हैं। लेकिन इससे भी अधिक भयानक बात यह है कि अब बिना कुछ किए जिस राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका समारोह एक जनवरी को निर्धारित है। उस पर अपनी नजर रखने की जरूरत है। ये मोईना और मलिक ने कहा है। राम मंदिर उद्घाटन के समय देश के कोने-कोने से हजारों, लाखों हिंदुओं को बुलाएंगे। बस लाएंगे, ट्रेन से भेजेंगे और समारोह के बाद वापस जाते समय मुस्लिम बस्तियों में पत्थरबाजी करके देश में दंगा भड़काया जाएगा, यह मत दोनों का है। फिर हमारे साथ वही होगा, फिर से धार्मिक विवाद भड़काकर ये सत्ता में बैठेंगे, फिर से अपने परिवार को रौंदेंगे। फिर सबका साथ सबका विकास होने पर सबको लात, दोस्तों का विकास होगा… इन सभी बातों को आपको ध्यान रखना है, ऐसा उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर कहा। इस दौरान मंच पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता, युवासेना प्रमुख, विधायक आदित्य ठाकरे, चंद्रकांत खैरे, विधान परिषद के विरोधी पक्षनेता अंबादास दानवे, पक्ष के सचिव विनायक राऊत, मिलिंद नार्वेकर, उपनेता लक्ष्मण वडले, संपर्कप्रमुख बबनराव थोरात, सांसद संजय जाधव, पोहरादेवी संस्थान के सुनील महाराज राठोड, पूर्व मंत्री डॉ. जयप्रकाश मुंदडा, पूर्व सांसद सुभाष वानखेडे, पूर्व आमदार डॉ. संतोष टारफे, नागेश पाटील आष्टीकर, रोहिदास चव्हाण, जिलाप्रमुख विनायक भिसे व संदेश देशमुख आदि उपस्थित थे।
लोग कतार लगाए खड़े रहे
हिंगोली के रामलीला मैदान में रविवार को जनसैलाब उमड़ा था। मैदान में जितनी भीड़ थी, उससे दोगुना भीड़ बाहर थी। शिवसैनिक गाते-बजाते, गुलाल उड़ाते हुए सभा स्थल तक पहुंच रहे थे। सबसे खास बात यह थी कि सभा के पंडाल में जाने के लिए शिवसैनिक पूरे अनुशासन के साथ कतार लगाए थे।
भारी बारिश में सभा का उत्साह
रामलीला मैदान में शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के ज्वलंत विचार सुनने के लिए तुफानी भीड़ इकट्ठा हुई थी। इसमें युवाओं की प्रचंड तादाद थी। सभा की शुरुआत होते ही बारिश शुरू हो गई। लेकिन लोग सिर पर कुर्सी लेकर खड़े रहे। बारिश जमकर हुई और बंद हो गई। इसके बाद लोग फिर से कुर्सी पर बैठे।

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