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जाड़े के दिन बीत गए

जाड़े के दिन बीत गए हैं
गर्मी के दिन आए सोनू
सोनू बोला बहुत ही दिक्कत
इस गर्मी में आती मोनू
धरती तपती, अंबर तपता
क्यारी सूखी, सूखे खेत
घास भी मांगे हैं पानी
पक्षी होते बड़े बेचैन
लूं की हवाएं चलती तेज
गरम हवा है तन को लगती
सूख जाते हैं नदियां व तालाब
रूप यौवन है मुरझा जाता
धूप के चलते वक्त डूबता
घर से निकले न पक्षी
आलस से दिन बीत है जाता
वीरान है पनघट, वीरान है नदी।
मोनू बोला तब सोनू से
बहुत ही होती है परेशानी
इसका एक उपाय है भाई
दुनिया जागे पेड़ लगाए
पेड़-पौधों से मिलेगी छाया
बैठ नीचे कुछ काम करेंगे
गर्मी फिर महसूस न होगी
दिन न जाएगा ऐसे भाई।
-सूरज निषाद,
लखनऊ

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