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वन टू का फोर!…. नई तकनीक से टोल नाकों पर नहीं लगेगी गाड़ियों की भीड़

•  अब एक साथ गुजर सकती हैं कई गाड़ियां
• एक मिनट में सेंसर करेगा १५ गाड़ियों को स्कैन
कुमार नागमणि / मुंबई । मुंबई में प्रवेश के लिए पांच टोल नाके बनाए गए हैं। इन टोल नाकों पर टोल भरने के बाद ही शहर में वाहन प्रवेश करते हैं। पर इस कारण इन पांचों प्रवेश द्वार पर अक्सर भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। यह ट्रैफिक टोल नाकों पर सिर्फ टोल वसूली के कारण होता है। इन टोल नाकों पर काम में तेजी लाने के लिए फास्टैग का इस्तेमाल शुरू किया गया है ताकि वैâमरे द्वारा एक-एक गाड़ी का स्वैâन कर उसे आगे जाने दिया जाए। पर जिस रफ्तार में वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसमें एक-एक गाड़ी की स्वैâनिंग भी नाकाफी साबित हो रहा है। इसलिए अब यहां एक नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया जानेवाला है। इसे वन टू का फोर कहा जा रहा है क्योंकि यहां एक की बजाय कई गाड़ी एक बार में स्कैन  हो सकती है।
फास्टैग की नई तकनीक शुरू होने के बाद जल्द ही इन टोल नाकों पर लगनेवाली गाड़ियों की कतार पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। कतार को खत्म करने के लिए प्रशासन ने फास्टैग तकनीक को और भी हाईटेक करने का निर्णय लिया है। इसके तहत टोल नाकों पर लगा एक फास्टैग सेंसर एक समय में एक साथ तीन गाड़ियों पर लगे फास्टैग स्टिकर को स्वैâन करेगा। इस तकनीक की मदद से एक मिनट में स्टिकर लगे १२ से १५ वाहन बिना रोके टोल नाकों को पार कर जाएंगे। बता दें कि मौजूदा समय में एक वाहन को स्कैन करने में १५ से २० सेकेंड का समय लग जाता है, जिससे गति में अवरोध पैदा हो जाता है।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सी-लिंक पर लगा सेंसर
टोल नाकों को महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) हाईटेक करने में जुट गया है। एमएसआरडीसी के मुख्य महाव्यवस्थापक कमलाकर फंड के अनुसार टोल वसूली की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए मौजूदा फास्टैग सेंसर में आधुनिक तकनीक लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। नए सेंसर एक समय में एक साथ तीन वाहनों को स्वैâन करने में सक्षम हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत बांद्रा-वर्ली सी-लिंक के १० लेन पर नए सेंसर लगाए गए हैं। इस वजह से प्रोजेक्ट के अच्छे नतीजे भी सामने आ रहे हैं। इसके सफल होने के बाद मुंबई के सभी पांच टोल नाकों पर इसे लगाया जाएगा।
मुंबई से जुड़े हैं ६ टोल नाके 
मुंबई में प्रवेश करते समय पांच टोल नाके लगते हैं। इसमें सायन-पनवेल महामार्ग पर वाशी टोल, ऐरोली ब्रिज टोल, एलबीएस मार्ग पर मुलुंड टोल, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे मुलुंड टोल, दहिसर टोल नाका का समावेश है। जबकि शहर के अंदर बांद्रा-वर्ली सी-लिंक पर एक छठा टोल है। फिलहाल सी-लिंक टोल को छोड़कर सभी टोल नाकों पर एक-एक वाहन को स्वैâन किया जा रहा है, जिसके कारण भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है।

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