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तानाशाही शासन खत्म किए बिना नहीं मानेंगे!… शरद पवार का मोदी पर जोरदार हमला

-खडसे ने मजबूरन लिया होगा फैसला उन पर जांच एजेंसियों का था दबाव

सामना संवाददाता / मुंबई

खडसे ने मजबूरन पैâसला लिया होगा, उन पर जांच एजेंसियों का भारी दबाव था। इस तरह का बड़ा बयान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने खड़से के भाजपा में एंट्री करने पर दिया है। कल जलगांव जिले के रावेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में राकांपा कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि हम मोदी के तानाशाही शासन को खत्म किए बिना नहीं मानेंगे।
सम्मेलन में शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज देश की तस्वीर बदल गई है। एक ऐसा देश जो अनाज का आयात कर रहा था, अब वही देश निर्यात कर रहा है। आज मोदी का राज है। अन्नदाता की मदद के लिए सरकार की ओर से कुछ नहीं किया जा रहा है। हालांकि, जवाहरलाल नेहरू की आलोचना जरूर हो रही है। क्या देश के लिए बलिदान देनेवालों की आलोचना करना प्रधानमंत्री का काम है? उन्हें याद रखना चाहिए कि वे देश के प्रधानमंत्री हैं, वे ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे भाजपा के प्रधानमंत्री हों।
तानाशाही की तरह हो रहा है सरकारी तंत्र का उपयोग
शरद पवार ने आगे कहा कि आज सूखे की स्थिति पैदा हो गई है, लेकिन सरकारी तंत्र का इस्तेमाल तानाशाही की तरह किया जा रहा है। मुख्यमंत्री को जेल भेजने का मतलब तानाशाही ही है। व्यक्तिगत उत्पीड़न हो रहा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इसकी वजह से कई लोगों को परेशानी हो रही है, इसका असर खडसे पर भी पड़ा होगा। उन पर जांच एजेंसियों का भी दबाव था इसीलिए उन्होंने अनिच्छा से ऐसा निर्णय लिया।
खत्म हुए बिना नहीं रहेगा मोदी का तानाशाही शासन
शरद पवार ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर ने अंतिम व्यक्ति के लिए काम करने का प्रयास किया था। अब लोगों को मोदी नहीं चाहिए। हमें तानाशाही नहीं, लोकतंत्र चाहिए। शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि मोदी का तानाशाही शासन खत्म हुए बिना नहीं रहेगा।

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