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बिन बर्फ कश्मीर में सब सुन्न

-31 दिसंबर बिना बर्फ के जश्न मनाने वाला कश्मीर अब दुआ कर रहा बर्फबारी के लिए

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

कश्मीर के लिए इस समय सबसे बड़ा चिंता का विषय बर्फ है, जिससे वह अभी तक वंचित है। मौसम विभाग भी अपनी भविष्यवाणियों पर खरा नहीं उतर रहा है। पिछले करीब एक पखवाड़े से वह कश्मीर को सूखे से जल्द मुक्ति मिल जाने की भविष्यवाणी तो कर रहा है वह धरातल पर प्रकृति की आंख मिचौली का खेल कश्मीरियों के दिलों की धड़कनें बढ़ा चुकी हैं।
अब भविष्यवाणी 10 जनवरी तक बर्फ न गिरने की है और भीषण सर्दी के दौर से गुजरने की है। हालत यह है कि पिछले दो दिनों से श्रीनगर से ज्यादा ठंडा जम्मू है। हालांकि, कश्मीर में भयानक सर्दी के दौर चिल्ले कलां का पहला पार्ट जारी है, पर जम्मूवासियों को ऐसा लगने लगा है कि जैसे इस बार चिल्ले कलां ने जम्मू में डेरा डाल लिया हो।
यही कारण था कि प्रदेश में 31 दिसंबर की रात को बर्फबारी का नजारा लेने के लिए एकत्र हुए हजारों पर्यटकों को निराशा तो हाथ लगी ही भयानक सर्दी और कोहरे ने उन्हें नानी याद दिला दी। इसमें कश्मीर के कई भागों में बिजली कटौती ने अपना तड़का भी लगाया था।
प्रदेश में बर्फ के बिना सब सुन्न भी है। यह पूरी तरह से सच है। गुलमर्ग की बात करें तो पिछले महीने के शुरू में गिरने वाली बर्फ पर स्कींइग अब खतरनाक होने लगी है, क्योंकि वह इस काबिल नहीं रही है तो गुरेज घाटी के 30 हजार नागरिकों के लिए शून्य से नीचे का तापमान चिंता का विषय इसलिए है, क्योंकि कड़कती धूप में अभी भी 85 किमी लंबा बांडीपोरा-गुरेज मार्ग खुला इसलिए हुआ है, क्योंकि गुरेज की जनता भी बर्फ की राह देख रही है।
जम्मू संभाग के पत्नीटाप में तो स्नो फेस्टिवल और स्नो गेम्स की तैयारियां भी रोक दी गई हैं। कारण पूरी तरह से स्पष्ट है। बर्फबारी का कोई आसार कहीं से नजर नहीं आ रहा है। मौसम विभाग भी परेशान है तो पत्नीटाप के सैकड़ों होटल वाले भी। इन होटलों में बुकिंग अब 35 प्रतिशत रह गई है, क्योंकि बाकी लोगों ने बर्फ न होने की स्थिति में अपनी बुकिंगें रद्द करवा दी हैं। बर्फबारी नहीं होने से प्रशासन भी चिंतित है। उसकी चिंता गर्मियों में पीने के पानी और बिजली उत्पादन को लेकर है। एक अधिकारी के बकौल, पहाड़ों पर जितनी देर से बर्फ गिरेगी, गर्मियों में परेशानी उतनी ही बढ़ेगी, क्योंकि अब गिरने वाली बर्फ जल्द पिघल जाएगी और दरियाओं में गर्मियों में पानी की कमी से बिजली उत्पादन भी कम हो जाएगा।

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