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डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट मानव इतिहास का सबसे गर्म साल है २०२३

नागमणि पांडे

२०२३ ने बदलते जलवायु के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अनचाहे मौसम का सामना लोगों को करना पड़ा है। तबाही हुई, जानें गई। सबसे गर्म साल भी यही रहा। ग्रीनहाउस गैसों का स्तर लगातार बढ़ने से समुद्री जलस्तर बढ़ रहा है। अंटार्टिका की बर्फ पिघल रही है। एक्स्ट्रीम वेदर की वजह से आपदाएं आ रही हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने दुबई में चल रहे सीओपी-२८ क्लाइमेट समिट में डराने वाली रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, २०२३ मानव इतिहास का सबसे गर्म साल रहा है। इसकी वजह से दुनियाभर में अलग-अलग स्थानों पर प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। ऐसा हुआ क्यों?

रिपोर्ट में बताया गया है कि अंटार्टिका की समुद्री बर्फ तेजी से पिघल रही है। इन बदलावों की वजह से अलग-अलग आपदाएं आ रही हैं और मौसम तेजी से बदल रहा है। डब्ल्यूएमओ ने स्पष्ट किया है कि २०२३ ऑन रिकॉर्ड सबसे गर्म रहा है। यह पिछले १७० सालों में १.४० डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा। इससे पहले २०२० और २०१६ को सबसे गर्म कहा गया था। इसकी वजह अलनीनो है। यह साल २०२३ में उत्तरी गोलार्ध में तेजी से उभरा और गर्मियों तक फैल गया। यह अगले साल भी यानी २०२४ में भी गर्मी बढ़ाएगा। डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रो. पेटेरी टालस ने कहा कि इस समय ग्रीनहाउस गैसों और वैश्विक तापमान की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है। प्री-इंडस्ट्रियल काल (१८५०-१९००) के समय की तुलना में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा ५० फीसदी बढ़ गई है। इसकी वजह से वायुमंडल में गर्मी जमा हो रही है। ज्यादा समय तक सीओ२ बनने से दुनिया का तापमान बढ़ता है। समुद्री जलस्तर २०१३-२०२२ के बीच १९९३-२००२ की तुलना में दोगुना तेजी से बढ़ा है। अंटार्टिका में १० लाख वर्ग किलोमीटर बर्फ पिघल गई। उधर, अमेरिका और यूरोप के उत्तरी इलाकों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर पिछले दो साल में १० फीसदी से भी ज्यादा पिघल चुके हैं। अंटार्टिका समुद्र में मौजूद बर्फ भी सामान्य स्थिति से नीचे है और वो भी पिघल रही है। साल २०२३ में तीन तरह के ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा तेजी से बढ़ी है। ये हैं- कार्बन डाईऑक्साइड, मिथेन और नाइट्रस ऑक्साइड। पिछले साल ये अपने रिकॉर्ड स्तर पर थे। कुछ इलाकों पर रियल टाइम डेटा देखने पर पता चलता है कि ये तीनों गैस इस साल भी तेजी से बढ़ी हैं। यानी अगले साल भी ये इसी तरह से डराती रहेंगी। वजह है बढ़ता तापमान।

एक्सट्रीम वेदर से कोई नहीं बच रहा
उन्होंने बताया कि समुद्री जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। अंटार्टिका की समुद्री बर्फ भी तेजी से पिघल रही है। वहां भी रिकॉर्ड बना है। ये सिर्फ आंकड़ों से बढ़कर डरावनी बातें हैं, जो आपको और हमको समझनी होंगी। पाकिस्तान, भारत, चीन, यूरोप और अमेरिका यानी दुनिया का कोई भी कोना एक्सट्रीम वेदर से बचा नहीं है। सभी इससे जूझ रहे हैं।

 

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