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माहवारी से बचने के लिए महिलाएं निकलवा रहीं गर्भाशय!… खराब जीवनशैली से ११ फीसदी बढ़े मामले

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में बीते कुछ सालों से महिलाओं हिस्टेरेक्टोमी यानी गभार्शय निकालवाने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि महिलाओं में यूट्रस से संबंधित बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि अमीर घरों की महिलाएं माहवारी से बचने के लिए भी एक उम्र के बाद सर्जरी करा रही है। हाल ही में किए गए शोध में बताया गया है कि देश में ४५ साल से अधिक आयु ११ फीसदी महिलाएं इस सर्जरी से गुजर रही हैं। हिस्टेरेक्टोमी का प्रचलन सबसे ज्यादा दक्षिणी राज्यों में बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि एडिनोमायोसिस बीमारी, गर्भाशय में किसी तरह की गांठ, सर्वाइकल वैंâसर और पेल्विक एरिया में लंबे समय से बने दर्द जैसी कई परेशानियों से राहत पाने के लिए हिस्टरेक्टोमी कराई जाती है। १० मई को सहकर्मी समीक्षा पत्रिका विमेंस रिप्रोडक्टिव हेल्थ में प्रकाशित शोध लेख में सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को उजागर किया है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि आर्थिक रूप से संपन्न महिलाएं अक्सर मासिक धर्म के दर्द से राहत पाने, जबकि गरीब महिलाएं गर्भाशय के आगे बढ़ने और अन्य कारणों से हिस्टेरेक्टोमी करवाती हैं। अध्ययन में शामिल इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज में मास्टर कर रहे छात्र गौरव गुन्नाल के मुताबिक, हिंदुस्थान में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के उपक्रम लोंगिच्यूडनल एजिंग स्टडी द्वारा एकत्र किए गए डेटा में लगभग ३४,९१९ महिलाओं की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया। इसमें से ११.५० फीसदी यानी ४,०१६ महिलाओं ने हिस्टेरेक्टोमी करवाई थी।
देश में हिस्टेरेक्टोमी का सबसे आम कारण २० फीसदी अत्यधिक रक्तस्राव पाया गया। उसके बाद १७.४० फीसदी फाइब्रॉएड या सिस्ट और १२.२० फीसदी मामलों में गर्भाशय का आगे आना था। अध्ययन में पाया गया कि देश में सबसे अधिक बच्चेदानी निकलवाने का प्रचलन दक्षिणी राज्यों १८.२० फीसदी है। इसमें दो या उससे ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं में हिस्टेरेक्टोमी करवाने की संभावना अधिक दिखी, जबकि केवल एक बच्चा या जिन्हें बच्चा नहीं हुआ था, उनमें यह संभावना कम मिली। अध्ययन में कहा गया है कि जनसांख्यिकी में कई महिलाओं ने गर्भाशय का हटाना को सुविधाजनक विकल्प के रूप में देखा।
सामाजिक कारकों से प्रभावित की जाती है महिलाएं
कम उम्र में शादी और ज्यादा बच्चे पैदा करने से हिस्टेरेक्टोमी की संभावना बढ़ जाती है। मुंबई में हुए एक नए शोध से पता चला है कि देश में महिलाओं के लिए हिस्टेरेक्टोमी सर्जरी सिर्फ मेडिकल कारणों से नहीं, बल्कि सामाजिक कारकों से भी प्रभावित करती है। अध्ययन में पाया गया कि अमीर महिलाओं और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं में हिस्टेरेक्टोमी की दर ज्यादा है।
यह है हिस्टेरेक्टोमी  
हिस्टेरेक्टोमी बच्चेदानी निकालने की सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें गर्भाशय को हटा दिया जाता है। एक बार जब कोई महिला हिस्टेरेक्टोमी कर चुकी है, तो उसे मासिक धर्म नहीं होगा और उसमें गर्भवती होने की क्षमता नहीं होगी। असामान्य रक्तस्राव, गर्भाशय फाइब्रॉएड, गर्भाशय आगे आना, एडिनोमायोसिस और गर्भाशय में वैंâसर के कारण एक महिला को हिस्टेरेक्टोमी (बच्चेदानी निकालने की सर्जरी) से गुजरना पड़ सकता है।

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