मुख्यपृष्ठखबरेंयादगार रहा चित्रनगरी संवाद मंच का महिला मुशायरा-कवि सम्मेलन

यादगार रहा चित्रनगरी संवाद मंच का महिला मुशायरा-कवि सम्मेलन

सामना संवाददाता / मुंबई
इस बार भी रविवार की शाम खुशगवार रही, जब शहर की महिला शायरात और कवयित्रियों ने मशहूर कथाकार सूरज प्रकाश की मौजूदगी में अपनी-अपनी रचनाओं से उपस्थित लोगों का मन जीत लिया।
साहित्यिक चित्रनगरी संवाद मंच की ओर से रविवार की शाम गोरेगांव (पश्चिम) के केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट हाल में किए गए कवयित्री सम्मेलन और मुशायरे में सभी महिला रचनाकारों ने बहुत उच्च स्तर की रचनाएं सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत ही धमाकेदार रही जब रितिका मौर्य रीत ने अपनी रचनाएं पढ़ी। उनकी गजल, ‘कोई अपना बचा न गैर यहां, पड़ गए थे अना के पैर यहां। गर खबर होती मुझे दुनिया की, मैं ना आती तेरे बगैर यहां।’ अच्छी पसंद की गई। इसके बाद आई तबस्सुम बरबेरावाला ने भी लोगों की वाहवाही लूटी। उनकी गजल, ‘मेरे सांचें में ढल रहे हो तुम, खुद को कितना बदल रहे हो तुम…’ को लोगों ने खूब सराहा। तदुपरांत रचना पाठ करने आई पूनम विश्वकर्मा की गजल ‘क्या कहूं किस मुसीबत में हूं, मैं खुद अपनी अदालत में हूं। एक औरत के हूं जिस्म में, इसका मतलब हिरासत में हूं…’ सुनकर हाल तालियों से गूंज उठा। शायरा जीनत एहसान कुरेशी ने गजल के साथ-साथ हास्य रचना भी सुनाई। शायरा आशु शर्मा और कार्यक्रम का संचालन कर रही प्रतिमा सिन्हा ने भी उच्च स्तरीय गजल पढ़ी। सीमा अग्रवाल का गीत कमला बहुत पसंद की गई। ‘बहुत दिनों के बाद मिली हो, कैसी हो कमला? पात्र महज बदले हैं, लेकिन सब कुछ जैसे का तैसा है, पगली, जो तब था वो रोना, अब भी वैसे का वैसा है, तेरी रामकथा का क्यों कर रावण नहीं जला…’ बहुत पसंद किया गया। अंत में कवयित्री दमयंती शर्मा का गीत ‘विरह व्यथित तप्त, आकुल हृदय पर, प्यार की बरसात बरसाओ जरा। पाएंगे इस जन्म में सातों जन्म, प्रेम सच्चा है तो है सौदा खरा। राधिका बन मैं तुम्हें भी जीत लूं मोहन, बांसुरी सांसों की होगी प्रीत का आधार…’ लोगों को बहुत पसंद आई। इस कार्यक्रम के प्रायोजक ट्यूब कट्स एंड शेप्स थे और इसका संचालक इंशाद फाउंडेशन ने किया। सहयोगी संस्था थी बज्म-ए-यारान-ए-अदब, सुखन सराय और हमारी प्रथा फाउंडेशन का भी सहयोग मिला। कार्यक्रम की शुरुआत में गीतकार देवमणि पांडेय ने चित्रनगरी संवाद मंच और इंशाद की उपलब्धियों की चर्चा की। अंत में नवीन जोशी नवा ने आए लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शहर की प्रमुख महिला रचनाकारों सहित बौद्धिक तबके के लोग अच्छी संख्या में उपस्थित थे।

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