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‘राज्य को अंधेरे में नहीं जाने देंगे!’…२८ हजार मेगावाट बढ़ी बिजली की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई । गर्मी के कारण बिजली की मांग २८ हजार मेगावाट तक बढ़ गई है। बिजली उत्पादन प्रभावित होने से बिजली कटौती की समस्या पैदा हो गई है। इस बीच ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी स्थिति में राज्य को अंधेरे में नहीं जाने देंगे और बिजली कटौती नहीं की जाएगी।
ऊर्जा मंत्री राऊत के अनुसार बिजली कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। मैं उन सभी बिजली कर्मचारियों को धन्यवाद देता हूं, जो काम पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अधिकांश बिजली के प्लांट चालू हैं। किसी भी स्थिति में कितनी भी बिजली की कमी क्यों न हो, हम बिजली की आपूर्ति बाधित नहीं होने देंगे।
बकाया पहुंचा रु. ६४ हजार करोड़ के पार
बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। दसवीं-बारहवीं की परीक्षा चल रही है। खेतों में फसल खड़ी है। बढ़ते तापमान के कारण कई लोगों को कूलर, एयर कंडीशनर और प्रिâज की जरूरत बढ़ गई है। बिजली की मांग २८ हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। डेढ़ से दो हजार मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी जा रही है। मांग और आपूर्ति में तकरीबन साढ़े तीन हजार मेगावाट का अंतर आ गया है। दूसरी ओर महावितरण का ग्राहकों पर बिजली बिल बकाया ६४,०९३ करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
राज्य की स्थिति
महानिर्मिति का विद्युत उत्पादन १०,८८६ मेगावाट है, जो विद्युत उत्पादन क्षमता का ८४ प्रतिशत है। इसमें से १६ फीसदी बिजली उत्पादन (२,०८० मेगावाट) विभिन्न और तकनीकी कारणों से कम हो गया है। भुसावल में २१० मेगावाट की यूनिट नंबर-३ और परली में यूनिट नंबर-६ कोयले के कारण बंद है। चंद्रपुर में ५०० मेगावाट की इकाई संख्या ६ और नासिक में २१० मेगावाट की इकाई संख्या ४ तकनीकी कारणों से बंद है। उरण में यूनिट नंबर २ गैस की कमी के कारण बंद है। पानी की कमी और हड़ताल के कारण कोयना घाटघर वैतरणा और अन्य जल विद्युत परियोजनाओं से कुल २४० मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।

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